Bharat Express DD Free Dish

क्या डिटेंशन सेंटर में ही रहेंगे अवैध प्रवासी? SC की सख्ती के बाद केंद्र सरकार का हलफनामा आया सामने

Deportation Rules: बिना राष्ट्रीयता सत्यापन के अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र सरकार ने डिटेंशन सेंटर और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट की है.

सुप्रीम कोर्ट की इमारत और यूजीसी का लोगो

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में 4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

Edited by Shubhra Rai

Deportation Rules: भारत मे डिटेंशन सेंटर में रह रहे लोगो को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट हलफनामा दाखिल किया. केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि जिस विदेशी नागरिक की राष्ट्रीयता को पुष्टि नहीं हुई है, उसे उसके देश में तब तक डिपोर्ट नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित देश उसकी नागरिकता की पुष्टि कर उसे स्वीकार करने के लिए तैयार न हो.

क्या है मामला?

दायर हलफनामा में यह भी कहा गया है कि, राष्ट्रीयता के सत्यापन के बिना डिपोटेंशन की प्रक्रिया शुरू ही नहीं कि जा सकती. गृह मंत्रालय ने यह जानकारी राजुबाल दास की ओर से दायर याचिका पर जारी नोटिस के जवाब में दिया है. यह मामला उन लोगों से जुड़ा है, जिन्हें विदेशी घोषित किया जा चुका है, लेकिन उनकी वास्तविक राष्ट्रीयता अब तक तय नहीं हो सकी है.

केंद्र सरकार ने कहा कि,

सामान्य स्थिति में किसी विदेशी नागरिक की सजा पूरी होने या उसके खिलाफ अदालत की कार्यवाही समाप्त होने के बाद यदि उसके पास वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज मौजूद हो और उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित न हो, तो संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) उसे डिपोर्ट कर सकता है.हालांकि यदि संबंधित व्यक्ति के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं है, तो उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि कर संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से यात्रा दस्तावेज प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

गृह मंत्रालय ने कहा कि,

किसी विदेशी की राष्ट्रीयता की पुष्टि और उसके मूल देश की सहमति के बिना डिपोटेंशन संभव नही है. सरकार द्वारा दायर हलफनामे में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीयता की पुष्टि होने और डिपोर्टशन संभव होने तक ऐसे अवैध प्रवासियों की आवाजाही पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगाना जरूरी है, ताकि वे फरार न हों राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित न हो और बाद में उन्हें उनके देश भेजा जा सके. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी केंद्र सरकार और असम सरकार से विदेश घोषित लोगों के डिपोटेंशन में हो रही देरी पर सवाल उठा चुका है.

जबरन बांग्लादेश भेजने को चुनौती दी गई

अदालत ने यह भी पूछा था कि कथित बांग्लादेशी नागरिकों को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखने के बजाए उन्हें वापस क्यों नही भेजा जा रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक डिटेंशन सेंटर में रखा जा सकता है या फिर उसे उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए. इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें पश्चिम बंगाल से कुछ लोगों को कथित तौर पर जबरन बांग्लादेश भेजने को चुनौती दी गई है.

यह भी पढ़ें-जयपुर में कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्धघाटन के दौरान सीजेआई ने कहा- ‘शांति और कानून एक दूसरे के पूरक है’

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read