Delhi Terror Conspiracy Case: सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन के दो सदस्यों की ओर से दायर जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दोनों दिल्ली में हथियारों और गोला बारूद की एक कथित अवैध फैक्ट्री से जुड़े आतंकी साजिश के मामले में 12 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है.
दायर जमानत याचिका पर सुनवाई
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अजहर की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने संकेत दिया है कि गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य मामले में उसके द्वारा तय किए गए सिद्धांत इस मामले पर भी लागू होगा.
अंसारी और अजहर को मार्च 2014 में गिरफ्तार
अदालत ने जनवरी 2026 को फैसला दिया था, जिसमें दिल्ली दंगों के मामले में पांच आरोपियों को जमानत दिया था. लेकिन कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था. अंसारी और अजहर को मार्च 2014 में गिरफ्तार किया गया था, जब पाकिस्तानी नागरिक जिया-उर-रहमान उर्फ वकास ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर उनके नाम बताए थे.
सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
अभियोजन पक्ष का दावा है कि वे इंडियन मुजाहिदीन के राजस्थान मॉड्यूल के सदस्य थे और आतंकवादी हमलों की योजना बनाने में शामिल थे. इसी साल अप्रैल में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अभियुक्तों के खिलाफ आरोप, उनसे कथित तौर पर बरामद सामग्री और राजस्थान के एक संबंधित मामले में उनकी दोषसिद्धि यूएपीए की धारा 43 डी (5) के तहत जमानत पर वैधानिक प्रतिबंध को आकर्षित करती है.
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि लंबे समय तक जेल में रहने के आधार बनाकर जमानत नहीं मांगा जा सकता. जिसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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