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सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के दो जजों को जमानत से जुड़ी स्पेशल ट्रेनिंग करने का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश के पालन नही करने वाले कड़कड़डूमा कोर्ट के दोनों जजों को जमानत का तरीका सीखने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री ने यह आदेश दिया है.

supreme court
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश के पालन नहीं करने वाले कड़कड़डूमा कोर्ट के दोनों जजों को जमानत का तरीका सीखने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री ने यह आदेश दिया है.

कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि दिल्ली न्यायिक सेवा के दो न्यायिक अधिकारियों को बाध्यकारी निर्णयों का उल्लंघन करते हुए दो आरोपियों को जमानत देने के अवैध और गलत तरीके के लिए कम से कम सात दिनों की अवधि के लिए विशेष न्यायिक प्रशिक्षण लेना होगा.

अधिकारियों के दृष्टिकोण अस्थिर व विकृत

सुप्रीम कोर्ट ने कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा दोनों आरोपियों को दिए गए अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए यह निर्देश दिया है. दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक अधिकारियों को कार्यवाही कैसे संचालित करनी है और हाई कोर्ट के फैसलों का सम्मान कैसे करना है. इस बारे में संवेदनशील बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवस्था करने का अनुरोध किया है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एस. वी. एन भट्टी की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के दृष्टिकोण अस्थिर और विकृत है.

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कोर्ट ने आगे कहा कि अभियुक्तों ने चार साल की अंतरिम सुरक्षा का लाभ उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट को गुमराह किया और बाद में नियमित जमानत की मांग करते हुए अपनी अग्रिम जमानत याचिकाओं की अस्वीकृति को छुपाया है.

न्यायिक अनुशासन का किया उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट धोखाधडी के मामले में आरोपित निखिल जैन को राहत देने से इनकार कर दिया था. लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-चार (उत्तर) और एडिशनल सत्र न्यायाधीश-चार ने निखिल जैन की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया है. जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों न्यायाधीशों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है.

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया ने अपने आदेश में कहा है कि रोहिणी कोर्ट में तैनात दोनों जजों ने न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष और जांच टीम में भी खामियां पाई और कहा कि उनकी भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने अपने फैसले में जरूरी कार्रवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजने का आदेश दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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