पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सेंट्रल फोर्स की तैनाती जारी रखने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के फैसले राज्य सरकार लेती है.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि 11 मई को सुनवाई कर सकता है. सनातन संस्था की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी. गिरी ने कहा कि 2021 में राज्य में चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल फोर्स को राज्य में रहने देना चाहिए.
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने और स्थिति की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित करने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की राहत के लिए याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए.
मतगणना और परिणाम के बाद हमारी भूमिका समाप्त- चुनाव आयोग
वही मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में निर्वाचन आयोग की ओर से उपस्थित वरिष्ठ नायडू डी एस नायडू ने भी कहा कि मतगणना पूर्ण होने और परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पिछली बार के ट्रेंड को.देखते हुए हिंसा की संभावना ज्यादा है.
हालांकि कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को कोलकाता हाई कोर्ट जाना चाहिए. बेंच ने कहा कि राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका फैसला करेगी. सीजेआई ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वे समझेंगे कि कानून और व्यवस्था उनका विषय है.
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-भारत एक्सप्रेस
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