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शिवसेना पार्टी सिंबल विवाद मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को करेगा सुनवाई

शिवसेना पार्टी सिंबल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। उद्धव ठाकरे गुट की याचिका 14 जुलाई को सुनी जाएगी. याचिका में चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती दी गई है.

Supreme Court
Edited by Akansha

शिवसेना पार्टी सिंबल विवाद मामले में दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर इनकार कर दिया है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने मेंशनिंग करते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले है. लिहाजा लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई कर ली जाए. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इसी तरह की मांग को लेकर जस्टिस सूर्यकांत के यहां मेंशनिंग की गई थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था.

कोर्ट 14 जुलाई को याचिका पर करेगा सुनवाई

कोर्ट 14 जुलाई को याचिका पर सुनवाई करेगा. उद्धव ठाकरे की ओर से पेश वकील ने दायर याचिका पर एक या दो दिन के भीतर सुनवाई की मांग की थी. इससे पहले जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए. जिसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कपिल सिब्बल से पूछा था कि आपको बहस करने के लिए कितना समय चाहिए ? सिब्बल ने 20 मिनट का समय मांगा था, सिब्बल ने चुनावों चिन्ह के बारे में जब बताया तो जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब दिया था कि लोग साक्षर हैं और शहरी क्षेत्रों में कोई बाधा नहीं है.

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से किया आग्रह

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह एक समस्या हो सकती है. सुनवाई के दौरान सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सूचीबद्ध करने का आग्रह किया. उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सिब्बल ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 2023 के संविधान निर्णय पर भरोसा कर रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि विधायी बहुमत को यह तय करने के लिए मानदंड के रूप में इस्तेमाल नही किया जा सकता कि कौन-सा गुट असली पार्टी है.

2022 में हो गया था शिवसेना के दो फाड़

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल विधायी बहुमत का परीक्षण के आधार पर निर्णय लिया. बता दें कि 2022 में शिवसेना के दो फाड़ हो गया था. शिवसेना में फूट पड़ने के बाद चुनाव आयोग ने शिवसेना और धनुष-बाण का चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे को दे दिया था. दायर याचिका में ठाकरे ने दलील दी कि चुनाव आयोग इस बात को समझने में विफल रहा है कि याचिकाकर्ता को पार्टी के कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ताओं से भारी समर्थन हासिल है.

इसके अलावा याचिका में यह भी कहा है कि चुनाव आयोग के पैरा 15 के तहत विवादों के तटस्थ मध्यस्थ के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहा है और उसने अपनी संवैधानिक स्थिति को कमजोर करने का काम किया है.

-भारत एक्सप्रेस 



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