सोनम वांगचुक
Supreme Court Hearing: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में रखा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार उनके बयानों को बहुत ज्यादा पढ़ रही है. कोर्ट में उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की याचिका पर सुनवाई हो रही है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ इस मामले को देख रही है.
रिहाई संभव नहीं- सरकार
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि वांगचुक की अब तक 24 बार स्वास्थ्य जांच हो चुकी है. वह पूरी तरह फिट हैं. उन्हें पेट की थोड़ी समस्या थी, जिसका इलाज चल रहा है. चिंता की कोई बात नहीं है. सरकार ने कहा कि इस आधार पर रिहाई की अनुमति नहीं दी जा सकती.
कोर्ट ने उठाए सवाल
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने दलील दी कि वांगचुक ने अपने भाषण में नेपाल जैसे हिंसक आंदोलन की संभावना का जिक्र किया था. उन्होंने कहा कि युवा शांतिपूर्ण तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि वांगचुक ने हिंसा की वकालत नहीं की. बल्कि, उन्होंने हिंसा की आशंका पर चिंता जताई है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि पूरा वाक्य पढ़ना चाहिए. कुछ लोग गांधीवादी रास्ता छोड़ रहे हैं, यह चिंता की बात है. फोकस अहिंसा से दूर जाने पर है.
सरकार की दलील पर कोर्ट की टिप्पणी
एएसजी नटराजन ने कहा कि वांगचुक ने हाइब्रिड अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल किया. इस पर अदालत ने कहा कि कुछ ज्यादा ही पढ़ा जा रहा है. कोर्ट ने सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया. मामले की सुनवाई जारी है. सोनम वांगचुक लद्दाख में पर्यावरण और शिक्षा के लिए काम करते हैं. उनकी हिरासत पर कई संगठन विरोध कर रहे हैं. यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
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