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सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंची कोर्ट, लगाए गंभीर आरोप; दिल्ली अदालत में दाखिल की याचिका

Delhi High Court: नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के खिलाफ उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गई हैं.

Sonam Wangchuk
Edited by Shubhra Rai

Delhi High Court: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दायर याचिका में उन्होंने सोनम वांगचुक को अस्पताल में जबरन रखने का आरोप लगाया है. उन्होंने अदालत से सोनम वांगचुक को तत्काल सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देने और अपनी पसंद की निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश देने की मांग की है. साथ ही परिवार के सदस्यों और वकीलों को मिलने की अनुमति देने की मांग की है.

क्या है मामला?

दायर याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके स्वास्थ्य की रोजाना सरकारी डॉक्टरों से निगरानी कराने का निर्देश दिया था. इसके बाद 18 जुलाई की सुबह पुलिस उन्हें जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई. पत्नी का दावा है कि उस समय उनकी हालत स्थिर थी और उन्हें जबरन अस्पताल ले जाने की कोई चिकित्सीय आवश्यकता नहीं थी.

परिवार ने अस्पताल की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किये

दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रशासन ने परिवार को पूरी मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई. पत्नी का कहना है कि 17 जुलाई की जांच में सोनम वांगचुक का पोटैशियम स्तर 4.3 था, जबकि अस्पताल ने 18 जुलाई को इसे 2.9 बताया. बाद में स्वतंत्र लैब से कराई गई जांच में पोटैशियम स्तर 3.6 पाया गया, जिससे परिवार ने अस्पताल की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. डॉ. आंगमो ने अदालत को बताया कि उन्होंने कई बार लिखित रूप से अनुरोध किया कि उनके पति को परिवार की पसंद के अस्पताल में शिफ्ट किया जाए, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इनकार कर दिया.

अस्पताल को निर्देश देने की मांग

उनका आरोप है कि सोनम वांगचुक को उनके वकीलों और पिछले 20 दिनों से इलाज कर रहे डॉक्टरो से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि सोनम वांगचुक की अस्पताल में लगातार मौजूदगी हाई कोर्ट के आदेश के तहत नहीं है, इसे असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए. साथ ही अदालत से अस्पताल को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह पूरी मेडिकल रिपोर्ट परिवार को उपलब्ध कराए, बिना सहमति कोई इलाज न करे और उन्हें तत्काल डिस्चार्ज कर परिवार के पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने एक दिन पहले ही सीजेआई सूर्यकांत को लेटर पिटीशन भेजा है. सीजेआई के भेजे गए पत्र में वकील नरेंद्र मिश्रा ने सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है. दायर याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान वांगचुक और अन्य अनशनकारियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में अनावश्यक हस्तक्षेप के करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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