दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘दूसरा’ को लेकर दायर याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने फिल्म की रिलीज रोकने की मांग स्वीकार नहीं की. हालांकि कोर्ट ने यह माना कि मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़ा सवाल उठता है. इसके बावजूद फिल्म को सिनेमाघरों से हटाने या उसके प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया.
निर्माताओं को डिस्क्लेमर लगाने का निर्देश
जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे फिल्म की शुरुआत और आखिर में स्पष्ट डिस्क्लेमर जोड़ें. इस डिस्क्लेमर में यह बताया जाए कि फिल्म में सौरभ गांगुली के नाम का उपयोग उनकी अनुमति या स्वीकृति के आधार पर नहीं किया गया है. अदालत ने कहा कि यह संदेश हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिखाया जाए और इसे बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया जाए ताकि दर्शक आसानी से उसे पढ़ सकें.
दो दिन के भीतर करना होगा बदलाव
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि डिस्क्लेमर जोड़ने की प्रक्रिया दो दिनों के भीतर पूरी की जाए. अदालत का मानना था कि दर्शकों को सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि किसी तरह का भ्रम पैदा न हो कि फिल्म में गांगुली की आधिकारिक सहमति शामिल है.
रिलीज के बाद दृश्यों को हटाना व्यावहारिक नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि फिल्म पहले ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है. ऐसे में कुछ हिस्सों को हटाना या जनता को फिल्म देखने से रोकना एक व्यावहारिक विकल्प नहीं माना जा सकता. कोर्ट की राय थी कि वर्तमान स्थिति में डिस्क्लेमर जोड़ना ही संतुलित और उचित समाधान होगा.
पहले भी रिलीज रोकने की मांग ठुकरा चुकी थी अदालत
इससे पहले सौरभ गांगुली ने 23 अक्टूबर को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उस आग्रह को भी स्वीकार नहीं किया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने फिल्म की स्क्रीनिंग कराने का निर्देश दिया था, ताकि यह जांचा जा सके कि वास्तव में गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं.
गांगुली ने लगाए हैं अधिकारों के उल्लंघन के आरोप
सौरभ गांगुली का कहना है कि फिल्म में उनके क्रिकेट करियर से जुड़े कई अहम प्रसंग दिखाए गए हैं. इसमें भारतीय टीम की कप्तानी, वर्ष 2002 नेटवेस्ट सीरीज फाइनल और लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट लहराने वाले मशहूर जश्न का संदर्भ भी शामिल बताया गया है. पूर्व कप्तान का आरोप है कि इन घटनाओं के जरिए उनके व्यक्तित्व और व्यावसायिक अधिकारों का उपयोग किया गया, जबकि इसके लिए उनकी अनुमति नहीं ली गई.
बिना इजाजत कमाई की कोशिश का दावा
गांगुली और लव फिल्म्स की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके नाम, तस्वीर और क्रिकेट जीवन के महत्वपूर्ण पलों का इस्तेमाल कर व्यावसायिक लाभ कमाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान और सार्वजनिक छवि का इस्तेमाल उसकी मंजूरी के बिना नहीं किया जाना चाहिए.
बायोपिक अधिकार को लेकर भी उठाया गया मुद्दा
लव फिल्म्स ने अदालत में 5 अगस्त 2021 के एक समझौते का भी हवाला दिया. कंपनी का दावा है कि सौरभ गांगुली पर बायोपिक बनाने का विशेष अधिकार केवल उसके पास है. निर्माताओं ने बताया कि इस अधिकृत बायोपिक में बड़ा निवेश किया जा चुका है और इसकी शूटिंग भी पूरी हो चुकी है. साथ ही परियोजना के व्यावसायिक अधिकारों के लिए लाइसेंसिंग की गई है, जिससे अन्य पक्षों के हित भी जुड़े हुए हैं.
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कोर्ट ने अपनाया संतुलन का रास्ता
पूरे विवाद पर फैसला देते हुए हाई कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाने के बजाय डिस्क्लेमर जोड़ने का रास्ता चुना. अदालत का मानना है कि दर्शकों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि फिल्म में सौरभ गांगुली के नाम और संदर्भों का इस्तेमाल उनकी आधिकारिक मंजूरी के साथ नहीं किया गया है. वहीं दूसरी ओर फिल्म के प्रदर्शन को रोकना इस समय उचित कदम नहीं होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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