दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक अहम कानूनी मामले में राहत मिल गई है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में कार्रवाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद शिकायतकर्ता की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार की अदालत ने सुनाया. मामला उस शिकायत से जुड़ा था जिसमें मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी.
शिकायतकर्ता ने दर्ज कराने की मांग की थी एफआईआर
पूरा विवाद राम निवास शर्मा द्वारा दायर शिकायत से शुरू हुआ था. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया जाए. यह शिकायत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के अंतर्गत दाखिल की गई थी. शिकायतकर्ता का आरोप था कि मुख्यमंत्री की एक टिप्पणी से भगवान हनुमान के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं.
पुलिस ने कहा- नहीं बनता कोई संज्ञेय अपराध
मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल की. पुलिस का स्पष्ट कहना था कि उपलब्ध तथ्यों और भाषण की पूरी सामग्री को देखने पर मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता. रिपोर्ट में बताया गया कि बयान का संदर्भ सरकारी कर्मचारियों के कामकाज की सराहना से जुड़ा था. साथ ही इसमें भगवान हनुमान के प्रति सम्मान का भाव भी दिखाई देता है. इसलिए इसे धार्मिक भावनाएं भड़काने या जानबूझकर आहत करने वाली टिप्पणी नहीं माना जा सकता.
धारा 299 के तहत नहीं मिले जरूरी आधार
दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और सामग्री की जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 के तहत अपराध के लिए जरूरी तत्व नहीं पाए गए. यह धारा उन मामलों पर लागू होती है, जहां किसी धर्म या धार्मिक विश्वास को जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया हो. पुलिस के अनुसार इस मामले में ऐसे संकेत नहीं मिले, जिनके आधार पर आपराधिक कार्रवाई की जा सके.
कश्मीरी गेट के कार्यक्रम से जुड़ा है मामला
विवादित बयान को लेकर शिकायत 23 सितंबर 2025 को हुए एक सरकारी कार्यक्रम के बाद सामने आई थी. यह आयोजन दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित आईएसबीटी में किया गया था. कार्यक्रम का उद्देश्य दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़ौत तक डीटीसी बस सेवा की शुरुआत करना था. इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा दिए गए भाषण के एक हिस्से को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी.
टिप्पणी को लेकर उठाए गए थे सवाल
शिकायतकर्ता का दावा था कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा था कि कुछ सरकारी अधिकारी अपनी अस्थायी शक्ति का उपयोग तभी करते हैं, जब उनकी पूंछ में आग लगती है. इसी बयान को आधार बनाकर आरोप लगाया गया कि यह टिप्पणी भगवान हनुमान से जोड़कर की गई है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची. शिकायतकर्ता ने अदालत से इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी.
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट से जताई सहमति
मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अदालत ने शिकायत को स्वीकार नहीं किया. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने माना कि शिकायत में ऐसे पर्याप्त आधार नहीं हैं, जिनके बल पर आगे आपराधिक कार्रवाई का निर्देश दिया जाए. इसी के साथ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज कराई गई शिकायत को खारिज कर दिया गया और उन्हें इस मामले में बड़ी कानूनी राहत मिल गई.
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