दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ को दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में डॉक्टरों के खिलाफ शारिरिक हिंसा को वीरतापूर्ण तरीके से दिखाया गया है.
सनी देओल अभिनीत यह फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. यह याचिका डॉक्टरों के एक समूह की ओर से दायर किया गया था. जस्टिस अमित महाजन की कोर्ट ने दायर याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाती है. साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है.
फिल्म में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में डॉक्टरों के खिलाफ शारीरिक हिंसा को वीरतापूर्ण अंदाज में दिखाया गया है. याचिककर्ताओ का कहना था कि इस तरह का चित्रण डॉक्टरों के प्रति हिंसा को बढ़ावा दे सकता है और समाज मे गलत संदेश दे सकता है. फिल्म की रिलीज को चुनौती देते हुए याचिका में इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी. चार डॉक्टरों (जिनमें डॉक्टर्स ऑफ कॉर्पोरेट सोसाइटी के पदाधिकारी भी शामिल है) द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि यह कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि अधिकारियों ने फिल्म के टीजर को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कि है.
याचिककर्ताओ का कहना था कि पहले ही मरीजों के नाराज परिजनों के हमलों का सामना कर रहे है. ऐसे में टीजर कॉर्पोरेट अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा करता है. दायर याचिका में कहा गया था कि देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्यकर्मियों को पहले से ही मरीजों के नाराज परिजनों के हमलों का सामना करना पड़ता है.
ऐसे में उनके खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला फिल्म का टीजर कॉरपोरेट अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों के लिए वास्तविक खतरा पैदा करता है.
दायर याचिका में मीडिया का हवाला देते हुए कहा गया था कि यह फिल्म मलयालम फिल्म जोसेफ का हिंदी रूपांतरण है. जोसेफ 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुई थी.
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