दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन देखने को मिल रहे थे, लेकिन अब दिल्ली के करीब 150 पुलिसकर्मियों द्वारा पुलिस मुख्यालय के बाहर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है. पुलिसकर्मियों के इस प्रदर्शन और वकीलों के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर अदालत 4 नवंबर को सुनवाई करेगी.
स्वतः संज्ञान लेने से इनकार और उचित याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों के खिलाफ एसीपी मनस्वी वशिष्ठ द्वारा की गई कथित टिप्पणी पर स्वतः (Suo Motu) संज्ञान लेने से इनकार कर दिया और वकीलों से उचित याचिका दायर करने को कहा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका दायर होने के बाद उसकी एक कॉपी दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग काउंसिल को दे दी जाए और भरोसा दिलाया कि अदालत इस मामले को देखेगी.
एसीपी की कथित टिप्पणी
मामले का जिक्र दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच के समक्ष किया गया. वकीलों ने कोर्ट को बताया कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर वकीलों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और AK-47 का जिक्र करते हुए धमकी दी गई. वकीलों का कहना था कि यदि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश स्वयं इस मामले में संज्ञान लेते हैं, तो इससे न्यायपालिका के प्रति भरोसा और मजबूत होगा.
सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर की गई है, जिसमें संबंधित एसीपी को बर्खास्त करने की मांग की गई है.
क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?
सोमवार को करीब 150 पुलिसकर्मी (जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं) पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए. इस प्रदर्शन में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ भी मौजूद थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब दिल्ली पुलिस के जवान सड़क पर उतरकर वकीलों के खिलाफ इस तरह पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं.
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प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी शाहदरा पुलिस थाने में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद दो पुलिस अधिकारियों के तबादले से नाराज हैं. उनकी मुख्य मांग है कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजा जाए. वकीलों से विवाद सामने आने के बाद इन अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया था.
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