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कोल्हापुर की महादेवी हथिनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका संशोधन की अनुमति दी, अब 25 अगस्त को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कोल्हापुर की महादेवी हथिनी के जामनगर स्थानांतरण मामले में दायर याचिका में संशोधन की अनुमति दी है. कोर्ट ने वंतारा वाइल्डलाइफ सेंटर को भी पक्षकार बनाने की मंजूरी दी और अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी.

Supreme Court

Kolhapur Elephant Mahadevi Case: सुप्रीम कोर्ट ने कोल्हापुर के एक मंदिर की हथिनी महादेवी के स्थानांतरण को लेकर दायर याचिका में संशोधन करने की अनुमति दे दी है. जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्न वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले में वंतारा के मालिक और संबंधित अधिकारियों को पार्टी क्यों नहीं बनाया गया है. कोर्ट ने वंतारा के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन सेंटर को भी पार्टी बनाने की अनुमति दे दी है. कोर्ट 25 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

याचिककर्ताओ का कहना है कि हथिनी को जबरन ले जाया गया और वह मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है. जुलाई में मुंबई हाई कोर्ट ने इसको लेकर जैन समुदाय की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था.

जनता का विरोध और राजनीतिक बयान

दायर जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थानांतरित किए जाने का विरोध हो रहा है. इसको लेकर हजारों लोग सड़कों पर है. जिसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार हथिनी को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. दायर जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि वंतारा ने पहले के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है और अवैध तरीके से हाथियों व अन्य जंगली जानवरों को अपने पास रखा है.

हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थानांतरित किए जाने के फैसले का लगातार विरोध हो रहा है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील जया सुकीन की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में एक समिति के गठन की मांग की गई है. साथ ही जब्त किए गए सभी हाथियों को उनके मालिक को वापस करने के आदेश देने की अनुमति की मांग की गई है. इसके अलावे सभी जंगली जानवरों और पक्षियों को मुक्त कर जंगल में छोड़ने की मांग की गई है.

2014 के सुप्रीम कोर्ट आदेश का हवाला

दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि त्रिपुरा हाई कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति असंवैधानिक है और वाइल्डलाइफ संरक्षण अधिनियम 1972 सहित अन्य कानूनों का उल्लंघन किया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि मंदिरों से हाथियों को जबरन ले जाया गया और मालिकों की सहमति के बिना वंतारा में रखा गया है. दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों, बब्बरों, शेरों और तेंदुओं जैसे जंगली जानवरों को बड़ी संख्या में भारत लाया गया और वंतारा में रखा गया है.

दायर याचिका में 2014 में सुप्रीम कोर्ट में WRRC नामक एनजीओ द्वारा दायर याचिका का हवाला दिया गया. जिस याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों को मंदिरों में इस्तेमाल करने को लेकर आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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