सुप्रीम कोर्ट.
IIT Kharagpur Suicide Case: सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर के छात्रों द्वारा किए जा रहे आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने पूछा कि आईआईटी खड़गपुर में क्या हो रहा है, छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? क्या आपने इस समस्या पर विचार किया? आपने क्या कदम उठाए है? जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस मामले में पिछले दिनों स्वतः संज्ञान लिया है.
कोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी में हुए आत्महत्या के मामले में चिंता व्यक्त करते हुए जांच में तेजी लाने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि जांच सही दिशा में होनी चाहिए. वही कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अपर्णा भट ने दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराया. उन्होंने कहा कि शारदा यूनिवर्सिटी मामले में 30 पन्नों की स्थितिरिपोर्ट दाखिल की गई है. एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें दो लोगों का नाम शामिल है, दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी- ‘कुछ न कुछ गड़बड़ है’
खड़गपुर के मामले में उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद जांच चल रही है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टास्क फोर्स इस मामले में कार्य कर रही है. लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट आने में समय लगेगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि “कुछ न कुछ गड़बड़ है”. कोर्ट ने दोनों संस्थाओं से पूछा था कि क्या मामलों की सूचना समय पर पुलिस को दी गई थी? कोर्ट ने पूछा था कि क्या एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस को तुरंत सूचित किया गया?
बात दे कि आईआईटी खड़गपुर के चौथे वर्ष के मेकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र रितम मंडल ने 18 जुलाई को आत्महत्या कर लिया था. रितम मंडल कोलकाता के रहने वाले थे और पांच साल के ड्यूल डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई कर रहे थे.
क्या सच में मानसिक उत्पीड़न बनी आत्महत्या की वजह?
छात्र हाल ही में दो महीने की गर्मी की छुट्टियों के बाद कैंपस में लौटे थे. इस वर्ष जनवरी से अब तक आईआईटी खड़गपुर कैंपस में इस तरह का यह चौथा मामला है. गत 12 जनवरी को इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र शाओन मल्लिक का शव फंदे से लटकती हालत में पाया गया था. वही ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास में बीडीएस द्वितीय वर्ष के छात्रा ज्योति शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी. ज्योति शर्मा द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट में महिला प्रोफेसर सैरी व महेंद्र पर जिम्मेदार बताया था.
हालांकि पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. छात्रा ने सुसाइड नोट में पीसीपी और डेंटल मैटेरियल्स के शिक्षकों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि उन्होंने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया, जिससे नउसे तनाव हुआ. उसने मांग की कि अगर उसकी मौत होती है तो शिक्षकों को जवाबदेह ठहराया जाए और उन्हें परिणाम भुगतने पड़े. इससे पहले कोर्ट ने आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त कर चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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