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बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 29 जुलाई को अगली सुनवाई तय

Bihar Election 2025: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पर 29 जुलाई को सुनवाई तय की है. कोर्ट ने आधार, राशन कार्ड और ईपीआईसी को पहचान के रूप में शामिल करने की बात कही है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

Bihar Election 2025: सुप्रीम कोर्ट बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया मामले में 29 जुलाई को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि 29 जुलाई को होने वाली सुनवाई में सभी वकील यह बताएंगे कि कौन से वकील कितने घंटे बहस करेंगे. उसके बाद कोर्ट तय करेगा कि इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आधार, राशन कार्ड और ईपीआईसी को शामिल करने को कहा था.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा ड्राफ्ट पब्लिश होने को लेकर सवाल उठाया. जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग का कहना है कि मसौदा सूची में जनवरी 2025 की सूची में शामिल सभी नाम शामिल होंगे. साथ ही अगर कोई आपत्ति हो तो उसे भी शामिल किया जाएगा. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि राशन कार्ड पर आपत्ति है. ईपीआईसी इसलिए नहीं क्योंकि यह विशेष सघन पुनरीक्षण है.

याचिकाकर्ता ने उठाया ड्राफ्ट लिस्ट पर सवाल

उन्होंने कहा कि आधार फॉर्म में मेंशन हैं. कोर्ट ने कहा कि आधार और ईपीआईसी को शामिल करें और कोई फर्जी मिले तो केस टू केस बेसिस पर एक्शन लें. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग का यह कदम संविधान के तहत वैध और अनिवार्य है. इसमें कुछ भी असंवैधानिक नही है. लेकिन कोर्ट ने माना कि था चुनाव से कुछ महीने पहले बिहार वोटर वेरिफिकेशन करना सही नहीं है. ये और पहले किया जाना चाहिए.

कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि आखिर आधार कार्ड नागरिकता के प्रमाण के तौर पर क्यों स्वीकार्य क्यों नहीं है? जिसपर आयोग की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग के पास लिस्ट की जांच करने का अधिकार है. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि आधार कार्ड गैर-नागरिकों को भी जारी किया जा सकता है, जो भारत में रहते है. भारत के हर निवासी इसका हकदार है. आधार अधिनियम देखिए. मैं सिर्फ आधार संख्या से नागरिकता का कोई प्रमाण नहीं बनाऊंगा.

उन्होंने कहा था कि अगर मेरे फॉर्म पर कोई आपत्ति है कि आप राकेश द्विवेदी नहीं है, तो मैं अपना आधारकार्ड निकालकर दिखा सकता हूं. कोर्ट ने मामले कि सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर आप हर वोटर की नागरिकता साबित करने बैठेंगे तो यह एक बहुत बड़ा काम हो जाएगा. यह काम आपका नहीं, गृह मंत्रालय का है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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