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‘2 साल से ज्यादा पुराना बिल नहीं मांग सकतीं कंपनियां’: जानिए सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Supreme Court Electricity Bill: पुराने बिजली बिलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि 2 साल पुराने बकाए को बिजली बिलों में लगातार नहीं दर्शाया गया है, तो कंपनियां उसकी वसूली नहीं कर सकती हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की रिहाई याचिका मामले में सुनवाई 3 सप्ताह के लिए टाली.

सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की रिहाई याचिका मामले में सुनवाई 3 सप्ताह के लिए टाली. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Electricity Bill: सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बिल के पुराने बकाया राशि को लेकर दायर याचिका पर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सामान्य तौर पर बिजली की खपत से जुड़ी कोई रकम दो साल के भीतर वसूल की जानी चाहिए. दो साल की अवधि के बाद भी बकाया वसूलना है तो उस रकम को लगातार बिजली बिलों में बकाया के तौर पर दिखाया जाना जरूरी है. ऐसा नहीं होने पर दो साल से अधिक पुरानी रकम की वसूली पर रोक रहेगी.

राशि को लंबित रखकर बाद में उसकी वसूली का दावा नहीं कर सकती

जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि बिजली कानून में निर्धारित समय-सीमा का उद्देश्य उपभोक्ताओं को लंबे समय बाद अचानक पुराने बिलों की मांग से बचाना है. बिजली वितरण कंपनी केवल लंबे समय तक किसी राशि को लंबित रखकर बाद में उसकी वसूली का दावा नहीं कर सकती है. कोर्ट ने कहा कि बिजली की खपत होने के बाद सामान्य तौर पर संबंधित अवधि का बिल दो साल के भीतर तैयार किया जाना चाहिए. यदि किसी कारण से कंपनी निर्धारित अवधि के बाद राशि की मांग करती है, तो यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित रकम पहले से ही बकाया के रूप में दर्शाया गया हो.

कोर्ट ने कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की उस अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है, जिसमें कंपनी ने उपभोक्ता से फरवरी 1998 से सितंबर 1998 के बीच के न्यूनतम खपत गारंटी शुल्क के तौर पर 57,74,164 रुपए की मांग की थी. बता दें कि यह मामला अतिरिक्त 2000 केवीए भार की आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन बाद में कंपनी ने अतिरिक्त 2000 केवीए भार देने की पेशकश की, लेकिन उपभोक्ता ने इसका इस्तेमाल नहीं किया. इसके बाद बिजली कंपनी ने उपभोक्ता से 57.74 लाख की मांग की.

मामला लोकपाल के पास पहुचा और लोकपाल ने बिजली कंपनी की मांग को खारिज कर दिया. जिसके बाद कंपनी ने हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से भी कंपनी को झटका लगा. उसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है.

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-भारत एक्सप्रेस



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