सुप्रीम कोर्ट ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह याचिका उत्तर भारतीय विकास सेना के अध्यक्ष सुनील शुक्ला ने दायर किया था. सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा सुनवाई से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका को वापस ले लिया है.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से हाई कोर्ट जाने को कहा
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा है. सीजेआई गवई ने पूछा कि क्या बॉम्बे हाई कोर्ट छुट्टी पर है? कोर्ट ने कहा कि हमने गुण-दोष पर विचार नहीं किया है. सुनील शुक्ला ने आरोप लगाया था कि उन्हें मनसे कार्यकर्ताओं की ओर से धमकाया जा रहा है. सुनील शुक्ला ने यह भी मांग की थी कि उन्हें पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए.
शुक्ला ने राज ठाकरे के खिलाफ दायर किया था याचिका
शुक्ला ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के खिलाफ यह याचिका दायर किया था. शुक्ला ने मनसे सैनिकों से धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया था. याचिका में 30 मार्च को गुड़ी पड़वा रैली के दौरान राज ठाकरे की ओर से दिए गए भाषण का भी जिक्र किया गया था. जिसमें राज ठाकरे ने अपने के कार्यकर्ताओं को कहा था कि वे जांच करें कि बैंकों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में मराठी भाषा का प्रयोग किया जा रहा है या नहीं. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग बैंक में जाकर मराठी भाषा के इस्तेमाल को लेकर हंगामा किया था.
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दायर याचिका में याचिका में की गई थी मांग
दायर याचिका में याचिका में मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग और राज्य सरकार को राज ठाकरे और उनकी पार्टी मनसे के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दे. याचिकाकर्ता का तर्क था कि ये कार्य आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए, 504, 506 और 120 बी और जनप्रतिनिधत्व अधिनियम 1951 की धारा 125 के प्रावधानों का उल्लंघन करते है, जो भाषा और क्षेत्र के आधार पर दुश्मनी को भी बढ़ावा देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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