KEAM 2025: केरल इंजीनियरिंग आर्किटेक्चर मेडिकल प्रवेश (KEAM) परीक्षा प्रक्रिया पर दखल देने से इनकार कर दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवेश परीक्षा की संशोधित अंकसूची के आधार पर इस वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न बोर्डों के अंकों के मानकीकरण के सूत्र में बदलाव करने की शक्ति से संबंधित कानूनी प्रश्न पर सुनवाई को तैयार हो गया है.
जस्टिस पीएसनरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ कुछ छात्रों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है. छात्रों ने केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी.
हाईकोर्ट ने रैंक सूची दोबारा तैयार करने का दिया था आदेश
दायर याचिका में KEAM परीक्षा परिणामों को इस आधार पर हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था कि मूल विवरणिका में दिए गए मानकीकरण सूत्र को बीच में ही बदल दिया गया था. हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने बिना संशोधित विवरणिका के अनुसार संशोधित परिणाम प्रकाशित किए, जिसके परिणाम स्वरूप सीबीएसई बोर्ड के अधिकांश छात्र शीर्ष रैंक पर आ गए.
दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि अंकों के मूल्यांकन की नई वेटेज क्राइटेरिया के कारण सीबीएसई के छात्रों ने अपना पिछला वेटेज खो दिया है. केरल हाई कोर्ट ने केईएएम रैंक लिस्ट को फिर से तैयार करने का निर्देश दिया था. साथ ही सीबीएसई छात्रों के अंकों के मूल्यांकन में बदलाव को भी रद्द कर दिया था.
हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रवेश प्रक्रिया के अंतिम चरण में प्रॉस्पेक्ट्स में बदलाव करना गलत था. मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने तर्क दिया था कि प्रॉस्पेक्ट्स में ये बदलाव राज्य के पाठ्यक्रम के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए किए गए थे.
उन्होंने कहा था कि इन नए बदलावों के बिना राज्य के पाठ्यक्रम का कोई भी छात्र शीर्ष दस में नही होता और केईएएम रैंक सूची में सुप्रीम कोर्ट 100 में से 86 छात्र सीबीएसई पाठ्यक्रम से थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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