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भीमा कोरेगांव मामला में सुप्रीम कोर्ट ने हनी बाबू को जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दी

Bhima Koregaon case: सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को उनकी जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दी.

Bhima Koregaon Case

Bhima Koregaon case: भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी हनी बाबू को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने निचली अदालत या हाई कोर्ट में जाने की छूट मांग करते हुए याचिका को वापस लेने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी.

जस्टिस पंकज मिथल और पीबी वराले की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हनी बाबू सुप्रीम कोर्ट में वापस ली गई याचिका को पुनर्जीवित करने का अनुरोध कर सकते हैं.

हनी बाबू ने 2024 में दायर जमानत याचिका को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि परिस्थितियों में बदलाव’ के कारण सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेना चाहते है.
लिहाजा कोर्ट इसकी अनुमति दे. जिसके बाद जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की बेंच ने हनी बाबू को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी.

हनी बाबू के वकील ने कोर्ट के संकेत दिया था कि वो दोबारा हाइकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करना चाहते है. बतादें कि बॉम्बे हाइकोर्ट ने एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू की याचिका को खारिज कर दिया था.हनी बाबू नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं.

NIA ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद की बैठक में कथित रूप से भड़काने वाले भाषणों के सिलसिले में जुलाई 2020 को हनी बाबू को गिरफ्तार किया गया था. परिषद की बैठक के अगले दिन जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा भड़क गई थी.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने लव जिहाद कानून पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया, मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस 



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