Digital Arrest Cyber Fraud Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 4 सप्ताह के भीतर साइबर फ्रॉड रोकने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा तैयार किया जाए. कोर्ट ने कहा कि यह समस्या बेहद गंभीर है. वरिष्ठ नागरिक, खासकर रिटायर्ड दंपत्ति इसके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं. पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी एक झटके में लुट जाती है.
डिजिटल अरेस्ट को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि अब तक 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है. यह आंकड़ा स्थिति की भयावहता को साफ दर्शाता है. कोर्ट ने कहा कि बैंक बोझ बनते जा रहे हैं. बैंकों को यह समझना होगा कि वे धन के संरक्षक हैं और ग्राहकों का भरोसा तोड़ने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है. वहीं डिजिटल अरेस्ट से जुड़े कई मामलों में तो बैंक अधिकारी ठगों के साथ मिले हुए पाए गए हैं.
कोर्ट के सामने एक चौंकाने वाला उदाहरण भी आया, जिसमें एक पूर्व बैंकर को डिजिटल अरेस्ट कर 23 करोड़ रुपये की ठगी की गई. पुलिस ने इस मामले में 12.11 करोड़ रुपये फ्रीज करा दिए हैं, लेकिन बाकी रकम अलग-अलग खातों के जरिए निकाल ली गई. यह मामला दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट IFSO को सौंपा गया है.
RBI के SOP को पूरे देश में लागू करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 2 जनवरी 2026 से लागू आरबीआई के SOP को पूरे देश में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. कोर्ट ने कहा कि अंतर-एजेंसी समन्वय और साइबर फ्रॉड पीड़ितों की पहचान के लिए यह SOP बेहद जरूरी है. नियमों को एक सप्ताह के भीतर अधिसूचित करने का भी आदेश दिया गया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है.
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बैंकों पर कोर्ट की सख्त फटकार
सीजेआई ने कहा कि बैंक धोखेबाजों को आसानी से ऋण दे देते हैं और बाद में एनसीएलटी जैसी कार्रवाई का सहारा लेते हैं. यह रवैया आम जनता के भरोसे को तोड़ने वाला है. बैंकों को ग्राहकों के धन की सुरक्षा के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील होना चाहिए. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी भी मामले में बैंक अधिकारी ठगों के साथ मिले हुए पाए गए, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
बता दें कि यह फैसला साइबर फ्रॉड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को साफ तौर पर दर्शाता है. डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के मामलों में अब तेज और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में ठोस सुधार और व्यापक जनजागरूकता के बिना इस समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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