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West Bengal Voter List: 75 साल के बुजुर्ग वकील का नाम वोटर लिस्ट से हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रिब्यूनल को दिया 2 महीने का अल्टीमेटम

SUPREME COURT ORDER: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को बंगाल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 75 वर्षीय वकील की याचिका पर 2 महीने में फैसला देने का निर्देश दिया.

Supreme Court
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में अपीलीय ट्रिब्यूनल को बड़ा निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने ट्रिब्यूनल से कहा है कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर एक 75 वर्षीय बुजुर्ग वकील की याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई करे. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल को अगले 2 महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता राज्य का असली निवासी

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि शुरुआती तौर पर (प्रथम दृष्टया) याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल का एक वास्तविक और स्थाई निवासी लग रहा है. अदालत ने इस बात की भी सराहना की कि बुजुर्ग वकील को मतदाता सूची से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए बनाई गई कानूनी व्यवस्था की पूरी जानकारी है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि 75 साल के यह बुजुर्ग वकील पिछले 5 दशकों (50 साल) से वकालत कर रहे हैं और राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले तक वे एक पूरी तरह वैध मतदाता थे.

मुर्शिदाबाद में 1977 से कर रहे हैं वकालत

अदालत के सामने यह तथ्य आया कि पीड़ित बुजुर्ग वकील साल 1977 से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में लगातार वकालत कर रहे हैं. उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल में गुहार लगाई थी, लेकिन वहां काफी समय से कोई फैसला नहीं हो पाया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमारी शुरुआती राय यही है कि उनका नाम इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए. उन्होंने यह भी साझा किया कि कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने फोन पर अपीलों के निपटारे के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया था, क्योंकि वहां ऐसी बहुत सी याचिकाएं पेंडिंग हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का किया निपटारा

बुजुर्ग वकील की परेशानी को समझते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल से विशेष अनुरोध किया है कि वे इस मामले को लटकाए न रखें और हो सके तो 2 महीने के अंदर अपना फैसला सुनाएं. इस निर्देश के साथ ही शीर्ष अदालत ने दायर याचिका का पूरी तरह निपटारा कर दिया है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने जैसी शिकायतों को दूर करने के लिए एक विशेष कानूनी व्यवस्था बना चुका है, ताकि किसी भी असली नागरिक का वोटिंग अधिकार न छीने.



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