सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में चिकित्सा अधिकारियों के स्थानांतरण के खिलाफ डॉक्टरों के एक समूह की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेंगलुरु के महानगरीय जीवन को “बहुत आकर्षक” बताया.
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि कर्नाटक के अन्य क्षेत्र भी विकसित हैं और डॉक्टर, जो समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग हैं, यदि स्थानांतरण का विरोध करेंगे तो यह अन्य कर्मचारियों के लिए गलत उदाहरण प्रस्तुत करेगा.
याचिका में कर्नाटक राज्य सिविल सेवा (चिकित्सा अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के स्थानांतरण का विनियमन) नियमावली, 2025 को चुनौती दी गई थी, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारियों के स्थानांतरण को नियंत्रित करती है. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये नियम उनके हितों के खिलाफ हैं. हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने पहले इन नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि नियम 2011 के अधिनियम की धारा 12 के तहत राज्य की शक्ति के अंतर्गत बनाए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को विचार के योग्य नहीं माना और इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे चुनौती देना उचित नहीं है. इस फैसले से कर्नाटक में चिकित्सा अधिकारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहेगी. यह निर्णय उन डॉक्टरों के लिए एक झटका है जो बेंगलुरु जैसे महानगरों में बने रहना चाहते थे. कोर्ट का यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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