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हिमाचल के जज अरविंद मल्होत्रा की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज; कॉलेजियम फैसलों में न्यायिक दखल देने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठता के आधार पर हाई कोर्ट जज बनने का दावा नहीं किया जा सकता और कॉलेजियम के फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने अरविंद मल्होत्रा की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट कॉलेजियम के फैसलों को चुनौती दी थी. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट कॉलेजियम को निर्देश नहीं दिया जा सकता है.

वरिष्ठ होने मात्र से जज बनने का अधिकार नहीं

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई अधिकारी वरिष्ठ है, उसे हाई कोर्ट जज बनाए जाने का अधिकार नहीं मिल जाता. कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित है. जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दायर याचिका का निपटारा कर दिया है.

न्यायिक अधिकारी का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए उनसे जूनियर अधिकारियों के नाम आगे बढ़ा दिए गए, जबकि उनके मामले पर विचार नहीं किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बलवीर सिंह ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले उनके मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन उस निर्देश का पालन नहीं हुआ. उन्हें सितंबर 2025 में बातचीत के लिए बुलाया गया था, और कुछ दस्तावेज व जानकारियां जमा करने को कहा गया था. हालांकि, उन दस्तावेजों का इंतजार किए बिना ही दो जूनियर अधिकारियों के नाम पदोन्नति के लिए अनुशंसित कर दिए गए.

पीठ ने उठाए सवाल

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि मामले को वापस भेजे जाने के बाद क्या कार्रवाई की गई? याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनके द्वारा मांगी गई जानकारी बाद में जमा की गई, लेकिन उससे पहले ही सिफारिशें कर दी गईं. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को खारिज किया गया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि कॉलेजियम ने उनके बारे में क्या विचार किया.

वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि यदि शिकायत केवल हाई कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश तक सीमित होती तो बात अलग थी, लेकिन अब उस पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश भी आ चुकी है. ऐसे में हाई कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर नहीं, बल्कि बाद की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है. यह याचिका धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने दायर की थी.

2 जून 2026 को तीन जजों की पदोन्नति को दी थी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 2 जून 2026 को हुई बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कांगड़ा) चिराग भानु सिंह, हाई कोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल भूपेश शर्मा और जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश जयसवाल को पदोन्नत कर हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है. इन तीनों न्यायिक अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी गई है. राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद उनकी नियुक्ति प्रभावी होगी.

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इससे पहले 2024 में हिमाचल प्रदेश में कार्यरत दो जिला जजों ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. दायर याचिका में कहा गया था कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट कॉलेजियम ने हाई कोर्ट में प्रमोशन के लिए नामों की सिफारिश करते समय उनकी योग्यता और वरिष्ठता दोनों को नजरअंदाज किया है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 में उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से उनके नामों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था.



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