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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया

मुंबई में गैर-माराठियों की पिटाई के आरोप पर राज ठाकरे के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Edited by Radha Priya

मुंबई में मराठी नही बोलने पर हो रही पिटाई को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे और उनके संबंधित राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई थी.

सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि यह याचिका पब्लिसिटी स्टंट के लिए दायर की गई है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि यह मामला महाराष्ट्र का है वहां हाई कोर्ट मौजूद है, आपको हाई कोर्ट में याचिका दायर करना चाहिए.

दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से ललिता कुमारी मामले के फैसले में जारी दिशा निर्देशों को लागू करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता घनश्याम उपाध्याय ने गैर मराठियों के हो रहे पिटाई के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजी थी, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नही करने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

राज ठाकरे पर भाषाई हिंसा भड़काने का था आरोप

याचिका में यह भी कहा गया था कि राज ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता दूसरे राज्यों से आए लोगों के खिलाफ हिंसा करते हैं और भाषाई आधार पर राजनीति करते हैं. याचिका में कहा गया था कि यह संविधान की मूल भावना और सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले में दिए गए दिशा निर्देशों के विपरीत है.

याचिका में कहा गया था कि 5 जुलाई को हुई विजय रैली में राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे. उस दौरान राज ठाकरे ने कथित रूप से कहा कि जो लोग मराठी नहीं बोलते, उन्हें कान के नीचे मारो. याचिका में इसे हिंसा विरोधी बताया गया था.

याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज ठाकरे का प्रेम और स्नेह मराठी भाषा के लिए नहीं बल्कि मुंबई नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर है और महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनावों में फायदा उठाने के मकसद से किया जा रहा है.

बता दें कि ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस को संज्ञेय अपराधों की सूचना मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए. पुलिस अगर ऐसा करने में विफल रहती है तो इसे कानून और संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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