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पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया की समय सीमा को सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के लिए बढ़ाया

पश्चिम बंगाल में SIR (सत्यापन) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसकी समय सीमा एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग के नोटिस जलाए जाने की घटना पर सख्त रुख अपनाया और बंगाल के डीजीपी से जवाब तलब किया है.

Supreme Court West Bengal SIR
Edited by Vaibhav Gupta

पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों में चल रहे एसआईआर में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा आयोग के नोटिस जलाने के आरोपों पर पश्चिम बंगाल के डीजीपी को हकफनामा दाखिल करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने राज्य में हो रहे एसआईआर प्रक्रिया की समय सीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह आदेश दिया है.

उपद्रवियों के खिलाफ कोई FIR नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि आयोग के नोटिस जलाने के बावजूद उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि यह संदेश जाना चाहिए कि देश का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है.

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि पश्चिम बंगाल राज्य यह सुनिश्चित करे कि सभी 8555 ग्रुप बी अधिकारी, जिनकी सूची सौंपी गई है, शाम 5 बजे तक जिला चुनाव अधिकारी को रिपोर्ट करें. कोर्ट ने कहा चुनाव आयोग के पास मौजूदा ईआरओ, एईआरओ को बदलने और योग्य पाए जाने पर अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा.

अनसुनी बात क्या है?

कोर्ट ने पिछली सुनवाई का हिस्सा रही ममता बनर्जी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. यह याचिका अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से दायर की गई थी. कोर्ट ने कहा यह कोई नई बात नहीं है, संविधान और उसकी संस्थाओं में विश्वास व आस्था को दर्शाता है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा इसमें अनसुनी बात क्या है? यह संविधान में विश्वास और आस्था को दर्शाता है.

पश्चिम बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से इस मुद्दे में राजनीतिकरण न करने की हिदायत दी. दरअसल ममता बनर्जी 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थी और अपनी दलीलें पेश की थी. ममता बनर्जी ने कहा था कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है. दूसरे राज्य में आधार सहित अन्य दस्तवेजों को स्वीकार कर रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल में स्वीकार नहीं कर रहा है. बनर्जी ने कहा था कि मैं उसी राज्य से हूं. आपकी दयालुता के लिए मैं आभारी हूं. जब न्याय दरवाजे पर दस्तक दे रहा था. तब हमें लगा कि हमें कही न्याय नहीं मिल रहा है. हमने चुनाव आयोग को 6 पत्र लिखे, मैं एक बंधुआ मजदूर हूं.

बता दें कि ममता बनर्जी ने कहा था कि मैं आपको उदाहरण दे रही हूं. मैं आपको तस्वीरों दिखा सकती हूं. ये मेरी तस्वीर नहीं है. ये प्रमुख समाचार पत्रों द्वारा प्रकाशित है. उन्होंने कहा था कि कुछ बेटियां जो.ससुराल चली गई है.उनका नाम एकतरफा हटा दिया गया. कभी कभी गरीब लोग फ्लैट खरीदते है.

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-भारत एक्सप्रेस



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