बीआरएस के 10 विधायकों के अयोग्यता को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना को स्पीकर को फैसला लेने के लिए अंतिम मौका दिया है. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर स्पीकर तीन सप्ताह में फैसला नही लेते है तो कोर्ट अवमानना आदेश जारी करने के लिए विवश होगा. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने यह आदेश दिया है.
इससे पहले भी कोर्ट ने फैसला लेने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया था. बीआरएस ने शुरू में 10 विधायकों को अयोग्य करने की शिकायत की थी. विधानसभा स्पीकर गद्दाम प्रसाद ने 15 जनवरी 2026 को दो विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था. इससे पहले विधानसभा स्पीकर ने पहले ही पांच विधायकों को क्लीन चिट दे दी थी. इसमें तेलम वेंकट राव, बंदला कृष्णमोहन रेड्डी, गुडेम महिपाल रेड्डी, टी. प्रकाश गौड़ और अरेकापुड़ी गांधी शामिल थे.
विधानसभा स्पीकर ने शिकायतों और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद, और सभी संबंधित पक्षों को प्राकृतिक न्याय के सिंद्धान्तों के अनुसार अपनी दलीलें पेश करने का मौका देने के बाद अपना फैसला सुनाया है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर को तेलंगाना विधानसभा स्पीकर को अवमानना का नोटिस जारी किया था.
बीआरएस ने सुप्रीम कोर्ट में उठाई आवाज
यह नोटिस बीआरएस के उन विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर समय रहते फैसला न लेने को लेकर जारी किया गया था, जिन पर कांग्रेस में शामिल होने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह इन याचिकाओं पर निर्णय लें. बीआरएस ने याचिका में अयोग्यता याचिकाओं पर तेलंगाना स्पीकर को जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की है. जिन 10 विधायकों पर दलबदल का आरोप लगा है उनमें श्रीनिवास रेड्डी परिगी, बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी, काले यादैया, टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, गुडेम महिपाल रेड्डी और एम. संजय कुमार शामिल है.
बीआरएस द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि विधायकों के खिलाफ शिकायत के 9 महीने बाद भी स्पीकर ने अभी तक कोई फैसला नही लिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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