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सुप्रीम कोर्ट में इतिहास दर्ज: 5 नए जजों के शपथ ग्रहण के साथ पूरी हुई स्वीकृत क्षमता, जजों की संख्या हुई 38

सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों ने शपथ ले ली है, जिससे कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है. सीजेआई सूर्यकांत ने विस्तार भवन में आयोजित समारोह में जजों को पद की शपथ दिलाई.

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सुप्रीम कोर्ट के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है. लंबित मुकदमों के बोझ तले दबे सुप्रीम कोर्ट को पांच नए जज मिल गए हैं. सुप्रीम कोर्ट में आयोजित समारोह में 5 जजों ने शपथ ग्रहण किया. सुप्रीम कोर्ट विस्तार भवन के सभागार में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सीजेआई सूर्यकांत ने इन जजों को शपथ दिलाई. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है (जो कि इसकी पूरी स्वीकृत क्षमता है).

अनुच्छेद 124 (3) के तहत राष्ट्रपति ने की नियुक्तियां

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति ने पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की. इसके मुताबिक, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124 (3) में प्राप्त शक्तियों के तहत इन जजों की नियुक्ति की है.

  1. जस्टिस शील नागू (पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)
  2. जस्टिस श्री चंद्रशेखर (बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)
  3. जस्टिस संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)
  4. जस्टिस अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश)
  5. वी. सुब्रमणि मोहना (सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील)

बार से सीधे जज बनने वाली दूसरी महिला बनीं वी. मोहना

वरिष्ठ वकील वी. मोहना बार (वकालत) से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला वकील हैं. इनसे पहले साल 2018 में इंदु मल्होत्रा सीधे वकील से सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं. गौरतलब है कि आने वाले दिनों में जस्टिस पंकज मित्तल 16 जून को रिटायर होंगे, जबकि जस्टिस जे. के. माहेश्वरी 28 जून को रिटायर होने वाले हैं.

कॉलेजियम की सिफारिश और अध्यादेश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 और 27 मई 2026 को हुई बैठकों में सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों को नियुक्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिन्हें अब राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया है. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसकी जानकारी खुद साझा की है. कॉलेजियम में भारत के सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस जे. के. महेश्वरी, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस एम. एम. सुंदरेश शामिल थे. इससे पहले हाल ही में एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी.

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जानिए नए न्यायाधीशों का सफरनामा

जस्टिस शील नागू: वर्ष 1987 में वकालत शुरू की थी. उन्होंने जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मुख्य रूप से दीवानी और संवैधानिक मामलों की पैरवी की. इसके बाद 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. दो साल बाद मई 2013 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया. मई 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. न्यायाधीश के रूप में 12 साल से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने 499 फैसले सुनाए हैं. वह पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए हैं.

जस्टिस श्री चंद्रशेखर: रांची में जन्मे जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की और 1993 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया. इसके बाद उन्होंने लगभग 19 वर्षों तक दीवानी और आपराधिक मामलों में सक्रिय वकालत की और अदालतों में अपना पक्ष रखा, जिनमें बड़ी संख्या सुप्रीम कोर्ट के मामलों की थी. वर्ष 2013 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. जून 2014 में उनकी स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि हुई. दिसंबर 2023 में उन्हें कुछ समय के लिए झारखंड हाई कोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था.

जस्टिस संजीव सचदेवा: इन्होंने 1988 में दिल्ली बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया और जिला अदालतों से लेकर दिल्ली हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों में पैरवी की. उन्हें जुलाई 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था. उसके बाद 2013 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद से सुप्रीम कोर्ट में जज बने हैं.

जस्टिस अरुण पल्ली: यह एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी चार पीढ़ियां कानूनी पेशे से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 1988 से पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट से वकालत शुरू की. सितंबर 2004 से मार्च 2007 तक उन्होंने पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर पक्ष रखा. अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था.

वी. सुब्रमणि मोहना: यह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनने तक का सफर तय किया है. वह ऐसे परिवार में जन्मीं, जिसका कानून के पेशे से कोई संबंध नहीं था. वर्ष 1983 में जब भारत में पहली बार पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम शुरू हुआ, तब उन्होंने कोयंबटूर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पहले बैच में दाखिला लिया था.



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