कोविडशील्ड वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों (Covishield side effects) से जुड़े मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 12 नवंबर को सुनवाई करेगा. यह याचिका दुष्प्रभावों के कारण मरने वाली लड़कियों के माता-पिता की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सुनवाई कर रही हैं. इससे पहले केंद्र सरकार ने इस मामले में हलफनामा दायर किया था. जिसमें कहा गया था कि उसे कोविड 19 टीकों के कारण होने वाली मौतों के लिए मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता.
एम्स के एक्सपर्ट को शामिल करने की मांग
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि जब हमने 2021 में यह मामला शुरू किया था, तो उन दो माता-पिता के संबंध में था, जिन्होंने 18 साल के बच्चों को खो दिया था. इससे पहले फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के स्वीकार के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने भी याचिका दायर की है.
याचिका में रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर जांच की मांग की गई है. कमेटी में एम्स के एक्सपर्ट को शामिल करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि कोविडशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) के दुष्प्रभावो और इसके जोखिम कारकों की जांच करने और वैक्सीन से हुए नुकसान का निर्धारण करने के लिए केंद्र को निर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि जो लोग इस वैक्सीन को लगाने की वजह से अक्षम हो गए हैं या जिनकी मौत हो गई है उन्हें मुआवजा देने की मांग की गई है.
बतादें कि फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने अदालत में स्वीकार किया है कि कोविडशील्ड वैक्सीन से थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है. टीटीएस को वजह से शरीर में खून के थक्के बन जाते है. यूके अदालत में चले एक मामले में कोर्ट में कंपनी ने अपने दस्तावेजों में यह माना है.
टीके से मौत का खतरा
फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में वैक्सीन विकसित की है. कंपनी कोर्ट में एक मुकदमे का सामना कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनके टीके के दुष्प्रभाव है और इससे मौत का खतरा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा गया है कि दो बच्चों के पिता एमी स्कॉट ने पिछले साल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था.
उन्होंने आरोप लगाया था कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लेने के बाद उनके शरीर में खून का थक्का जम गया था, जिससे वह काम करने में असमर्थ हो गए थे. अप्रैल 2021 में टीका लगने के बाद उन्हें मस्तिष्क में स्थायी चोट लग गई थी. दिमाग मे यह चोट खून का थक्का यानी ब्लड क्लॉट की वजह से हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक हाइकोर्ट में इस तरह के 51 मामले दर्ज किए गए है, जिनमे 100 मिलियन पाउंड तक कि अनुमानित शक्ति की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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