सुप्रीम कोर्ट ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित पोस्ट करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद अमीर अजमद अली खान महमूदाबाद के मामले में तीन महीना बाद सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुका है, लेकिन निचली अदालत ने अभी तक उसपर संज्ञान नही लिया है. उन्होंने कहा कि दो आरोपों पर राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है, जो अभी तक नही मिली है. इसपर सीजेआई ने पूछा कि मंजूरी कौन देगा. एसवी राजू ने बताया कि यह स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा दी जानी है. वही जस्टिस बागची ने पूछा कि स्वीकृति के लिए आवेदन कब किया गया था. एएसजी ने बताया कि 22 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई थी और उसमें स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति लंबित है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कोर्ट पहले ही यह कह चुकी है कि मामले को केवल पोस्ट की सामग्री तक सीमित रखकर देखा जाए. उन्होंने कहा कि पोस्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे अपराध बनता हो. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यदि सक्षम प्राधिकारी नरम रुख अपनाता है तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है.
कपिल सिब्बल की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट में बहस
हालांकि कपिल सिब्बल ने आशंका जताई कि यदि भविष्य में स्वीकृति दे दी गई तो क्या होगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभी इस केस में निचली अदालत दायर चार्जशीट पर संज्ञान न ले, आरोप तय न किए जाए. मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस की ओर से बताया गया है अली खान के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थी. एक केस में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है, दूसरे केस में चार्जशीट दाखिल की गई है.
अली की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि धारा 152 की संवैधानिकता से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उसके बावजूद इसका इस्तेमाल हो रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अली की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था.
साथ ही कोर्ट ने एसआईटी को फटकार लगाते हुए जांच को दो एफआईआर तक ही सीमित रखने का आदेश दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपको प्रोफेसर की जरूरत नहीं है, आपको डिक्शनरी की जरूरत है. कोर्ट ने कहा था कि एसआईटी को अब महमूदाबाद को दोबारा पूछताछ के लिए तलब करने की आवश्यकता नहीं है.
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ मामला
कोर्ट ने एसआईटी को याद दिलाया था कि उसे सिर्फ पोस्ट की भाषा और अभिव्यक्ति में अपराध के पहलुओं की जांच करनी है, न कि व्यापक जांच करनी. एक निजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था. अली के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

