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एसिड अटैक पीड़िता की याचिका पर केंद्र सरकार सहित सभी राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने जबरन एसिड पिलाने की घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

एसिड अटैक की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती रहती है. इनको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई दिशा निर्देश भी जारी किया गया है. लेकिन अब जबरन एसिड पिलाने की घटना सामने आई है. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बागची की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका शाहीन मलिक जो खुद एसिड पीड़िता है, उनकी ओर से दायर की गई है. सीजेआई ट्रायल में 16 साल की देरी पर सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था का कितना मजाक है, यह बहुत शर्मनाक है. 2009 का ट्रायल अभी चल रहा है. अगर राष्ट्रीय राजधानी इसे नहीं संभाल सकती तो कौन संभालेंगे? इतना ही नही कोर्ट ने देश मे सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार से अदालतों में लंबित ट्रायल से संबंधित जानकारी मांगी है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से कहा है कि इस तरह की पीड़िताओं को लेकर विधेयक लाए.

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराज़गी

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि उसपर 2009 में एसिड अटैक हुआ था, लेकिन 2013 तक कुछ नही हुआ. इसपर कोर्ट ने पीड़िता को स्पीडी ट्रायल के लिए अर्जी दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक दिन मामले में सुनवाई हो.

सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि जब न्याय पाने की उम्मीद टूट चुकी थी, उसी दौरान हिसार फैमिली कोर्ट के सीजेएम परमिंदर कौर ने केस को दोबारा ओपन करवाया, उसके बाद से न्याय की उम्मीद जगी और अब मैं एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए काम करती हूं. पीड़िता की मांग है कि जिस तरह से एसिड अटैक पीड़ितो को दिव्यांगता का दर्जा दिया जाता है. उसी तर्ज पर एसिड पीने के लिए मजबूर करने वाली पीड़िताओं को भी दिव्यांगता का दर्जा मिलना चाहिए.

आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं- CJI सूर्यकांत

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि जबरन एसिड पीने के लिए मजबूर महिलाएं चल नही सकती है, कृत्रिम नली के जरिए फूड दिया जाता है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें इसे एक विकलांगता के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरोपियों के साथ भी ऐसी ही निर्दयता से पेश आना चाहिए. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बिल्कुल ऐसे आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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