Supreme Court Order On Aravalli Range: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज में अवैध और अंधाधुंध खनन को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है. CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को गुजरात से दिल्ली तक फैली पूरी अरावली रेंज के लिए खनन प्रबंधन योजना (MPSM) तैयार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह योजना अंतिम रूप नहीं ले लेती तब तक राज्यों को कोई नई खनन लीज जारी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट की CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला अरावली पहाड़ियों की एकसमान परिभाषा के अभाव में हो रहे अवैध खनन की चिंताओं के बीच दिया है. इसमें 31 पहाड़ियों के गायब होने के मामले सामने आए थे. कोर्ट के इस फैसले के बाद अरावली रेंज की नई परिभाषा सामने आएगी और उसे बचाया जा सकेगा.
नई परिभाषा को मंजूरी, खनन बैन (Supreme Court judgment On Aravalli)
कोर्ट को बताया गया कि अभी तक अरावली पहाड़ों की कोई एक पक्की परिभाषा नहीं है. हर राज्य अपनी मनमानी करता है, जिससे अंधाधुंध खुदाई हो रही है. 2018 की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि राजस्थान और हरियाणा में 3,000 से ज्यादा जगहों पर खुदाई के कारण 31 पहाड़ियां पूरी तरह गायब हो चुकी हैं. इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने एक एक्सपर्ट कमेटी की दी गई परिभाषा को मान लिया है. CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि-
‘हम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश देते हैं कि वह ICFRE के माध्यम से गुजरात से दिल्ली तक फैली हुई संपूर्ण अरावली रेंज के लिए एक सतत खनन प्रबंधन योजना (MPSM) तैयार करे. जब तक ICFRE के माध्यम से MoEF&CC द्वारा MPSM को अंतिम रूप नहीं दिया जाता, तब तक कोई भी नई खनन लीज प्रदान नहीं की जाएगी.’
क्या होगी नई परिभाषा? (Supreme Court definition of Aravalli)
कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति (CEC) द्वारा प्रस्तावित अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को स्वीकार कर लिया है. इसके अनुसार 100 मीटर या उससे अधिक की ऊंचाई वाली कोई भी ढलान अरावली पहाड़ियों के रूप में मानी जाएंगी. इसके तहत खनन को कोर/अलंघनीय क्षेत्रों (Core/Inviolate areas) में पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाएगा. कोर्ट ने माना कि अरावली पारिस्थितिकी तंत्र ‘ग्रीन बैरियर’ के रूप में कार्य करता है और यह उत्तर भारत के जलवायु और जैव विविधता को प्रभावित करता है.
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वैध लीज को जारी रहेंगी
हालांकि, कोर्ट ने वर्तमान में चल रही वैध लीज को जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि MPSM तैयार होने के बाद ही खनन की अनुमति केवल उन्हीं क्षेत्रों में दी जाएगी जहां वैज्ञानिक रूप से सतत खनन संभव है. यह निर्णय अरावली रेंज के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बहाल करने और मरुस्थलीकरण से मुकाबला करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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