पटाखा बैन पर राहत देने की जल्दबाजी में नहीं सुप्रीम कोर्ट, संतुलित कदम उठाने के निर्देश. (PC: भारत एक्सप्रेस)
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन)एक्ट 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका संजय प्रकाश और 33 अन्य लोगों ने वकील ममीदिपुड़ी वेंकटराम मुकुंदा के माध्यम से दायर की गई है.
याचिका दाखिल करने वाले कैडर अफसरों में शौर्य चक्र विजेताओ के अलावा महिला अधिकारी भी शामिल है. दायर याचिका में केंद्रीय औधोगिक सुरक्षा बल के अधिकारी हैं, जो एंटी 2, लिस्ट I, सातवी अनुसूची के तहत केंद्र की एक सशस्त्र बल है और बीएफएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के साथ अनौपचारिक रूप से सेंट्रल आर्म्ड पुलिसफोर्स के रूप में बताई जाती है.
याचिकाकर्ता ने इस अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के साथ-साथ शक्तियों केपृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए इसे असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है.
प्रतिनियुक्ति, कैडर समीक्षा और पदोन्नति व्यवस्था पर केंद्रित है याचिका
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीएपीएफ ( सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 का उद्देश्य केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव को समाप्त करना है. ऐसा करना संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है कि 23 मई 2025 को संजय प्रकाश बनाम भारत संघ मामले में स्पष्ट निर्देश दिया कि सीएपीएफ में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति वाले पदों को निर्धारित अवधि, जैसे दो वर्ष, में चरणबद्ध तरीके से काम किया जाए.
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय सशस्त्र बलों को केवल गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन के लिए ही नही बल्कि कैडर समीक्षा सहित सभी कैडर संबंधी मामलों में भी संगठित ग्रुप -ए सेवाओ का हिस्सा माना जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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