सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर एक नई अर्जी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने कर्नाटक सरकार को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई आगामी अक्टूबर महीने में होगी.
तमिलनाडु सरकार की मांग और आरोप
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. तमिलनाडु सरकार ने अपनी नई याचिका में कोर्ट को बताया कि मौजूदा समय में कर्नाटक की ओर से कावेरी जल की आपूर्ति में करीब 16 टीएमसी (TMC) पानी की कमी रह गई है.
याचिका में मांग की गई है कि इस कथित कमी को अनुपातिक (Proportional) आधार पर पूरा करने के लिए कर्नाटक सरकार को तुरंत अतिरिक्त पानी छोड़ने का निर्देश दिया जाए.
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि राज्य के हिस्से में हुई पानी की इस भारी कमी की भरपाई नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन प्राधिकरण ने कमी को पूरा करने के आदेश देने के बजाय अलग-अलग मौकों पर केवल कम मात्रा में पानी छोड़ने के ही निर्देश जारी किए.
कर्नाटक सरकार का विरोध और दलीलें
दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने तमिलनाडु की इस नई मांग का कड़ा विरोध किया है. कर्नाटक ने कहा कि राज्य में सूखे जैसी गंभीर स्थिति होने के बावजूद उसने सीडब्ल्यूएमए (CWMA) के तय दिशा-निर्देशों से अधिक पानी छोड़ा है.
कर्नाटक सरकार का कहना है कि सीडब्ल्यूएमए इस विवाद से जुड़ी एक विशेषज्ञ और वैधानिक संस्था (Statutory Body) है, जिसे दोनों राज्यों की वास्तविक जल उपलब्धता, मौसम और परिस्थितियों का आकलन करके ही कोई भी निर्णय लेना चाहिए.
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राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कर्नाटक ने हमेशा प्राधिकरण के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया है, और जल वितरण से जुड़े ऐसे विवादों को पहले संबंधित वैधानिक प्राधिकरण के स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए.
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