Bharat Express DD Free Dish

शादी के बाद लड़कियों और उनके परिवारों का अपमान करना समाज में गंभीर समस्या बन चुकी है- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और महिला के साथ क्रूरता के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि शादी के बाद बेटियों और उनके मायके वालों का अपमान करना एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

West Bengal, Supreme Court, TMC

दहेज उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शादी के बाद लड़कियों और उनके परिवारों का अपमान करना समाज में गंभीर समस्या बन चुकी है और ऐसे मामले में सख्त संदेश जाना चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के पीठ ने छत्तीसगढ़ के एक मामले में यह टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि लड़कों को शादी के बाद दूसरों की बेटियों और उनके परिवार को अपमान करने का कोई हक नही है. कोर्ट ने कहा कि लोग पैसे मांगकर फिर उन्हें भिखारी कहते है, इस मामले में समाज मे कड़ा संदेश जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि दुल्हन या उसके मायके वालों की बेइज्जती बर्दाश्त नही की जाएगी. कोर्ट ने आरोपी पति और उसके परिवार को राहत देने से इनकार करते हुए जेल भेज दिया है.

यह मामला 2010 का है. छत्तीसगढ़ में शादी के सिर्फ तीन साल के भीतर एक महिला ने फांसी लगाकर जान दे दी थी. महिला के परिवार ने आरोप लगाया कि कार और कैश की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित किया जा रहा था. मौत शादी के तीन साल के भीतर अप्राकृतिक रूप से हुई थी इसलिए, कोर्ट ने इसे कानूनन ‘दहेज हत्या’ की श्रेणी में माना. निचली अदालत ने इस मामले पर पहले फैसला सुनाते हुए इसे दहेज हत्या माना था.

निचली अदालत और हाई कोर्ट के फैसले को मिली पुष्टि

कोर्ट ने कहा था कि महिला के परिवार की ओर से पेश किए गए सबूतों से पता चलता है कि मौत से कुछ समय पहले बार-बार पैसों की मांग और क्रूरता की जा रही थी. भले ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी के चलते दम घुटना बताया गया हो, लेकिन कोर्ट ने माना कि आसपास की स्थिति जैसे दहेज की मांग, घटना से कुछ समय पहले हुआ भुगतान, उत्पीड़न और क्रूरता मौत से सीधे तौर पर जुड़ते नजर आ रहे है. पति के परिवार के कई सदस्यों को धारा 304 बी (दहेज हत्या), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498A (क्रूरता और उत्पीड़न) सहित कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया. मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा. अब देवर ने फैसले को चुनौती दी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

आरोपी को मिली सजा पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को खुश होना चाहिए कि उसे तीन साल की सजा मिली है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर लड़की के परिवार वालों को आर्थिक रूप से निचोड़ने की कोशिश की जाती है. कोर्ट ने कहा कि दहेज प्रताड़ना को सामान्य मान लिया गया है जो खतरनाक है. कोर्ट ने कहा कि यहां तक कि पढ़े लिखे परिवार में भी बहुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है.

जिस्टिस उज्जवल भुइयां ने कहा कि यह दिखाता है कि पढ़े लिखे शिक्षित लोग भी महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज को लेकर होने वाली प्रताडना और आत्महत्या के मामलों में नरमी नही बरती जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: ’20 लाख लोगों की जिंदगी से खिलवाड़…’ जोजरी नदी मामले में राजस्थान सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, SIT करेगी जांच

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read