Supreme Court गोवा के महादेई वाइल्डलाइफ सेंच्युरी और उसके आसपास के क्षेत्रों को टाइगर रिजर्व घोषित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) को जांच करने का आदेश दिया है. सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकार की पीठ ने जांच कर 6 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.
कोर्ट 12 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही कोर्ट ने उन क्षेत्रों में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुलाई 2023 के आदेश में टाइगर रिजर्व घोषित करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने गोवा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप अपनी लापरवाही का लाभ नही उठा सकते है.
सुप्रीम कोर्ट गोवा सरकार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रहा है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गोवा सरकार तीन महीने के भीतर महादेई और उससे लगे इलाकों को टाइगर रिजर्व घोषित करने को कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि यदि टाइगर रिजर्व घोषित किया जाता है तो उसके आसपास बफर जोन बनाना होगा, जिससे राज्य की 20 फीसदी भूमि प्रभावित होगी और आसपास रहने वाले लोगों पर इसका असर पड़ेगा.
गोवा टाइगर रिजर्व पर विवाद, फाउंडेशन ने उठाए सवाल
वही गोवा फाउंडेशन ने आपत्ति जाहिर करते हुए राज्य द्वारा दिए गए वाणिज्यिक परियोजनाओं को मंजूरी पर सवाल उठाए हैं. गोवा फाउंडेशन ने सुनवाई के दौरान कहा कि नेशनल टाइगर रिजर्व बनाने की सिफारिश कर चुकी है, क्योंकि यहां बाघों की स्थायी आबादी मौजूद है.
बता दें कि हाई कोर्ट ने गोवा सरकार को 12 महीने मेंवनवासियों के अधिकारों का निपटारा करने, 6 महीने में एंटी-पोचिंग कैंप स्थापित करने और टाइगर कंजर्वेशन की व्यापक योजना बनाने का निर्देश दिया था. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि बाघों की सुरक्षा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जल एवं मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए बेहद जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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