सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मगध विश्वविद्यालय द्वारा एक वकील की शैक्षणिक डिग्री होने का दावा करने के बाद मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह निर्देश दिया हैं. सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर यह आदेश दिया है. कोर्ट सीबीआई को 30 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट देने को कहा है.
मार्कशीट और बी.कॉम डिग्री को बताया जाली
जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि हम सीबीआई से जांच कर यह पता लगाना उचित समझते हैं कि याचिकाकर्ता की ओर से मगध विश्वविद्यालय से वर्ष 1991 में बी. कॉम परीक्षा उतीर्ण करने की जो डिग्री पेश की गई है वह असली है या नकली. इससे पहले मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी एक पत्र पर संज्ञान लिया था, जिसमें कहा गया था कि अधिवक्ता की मार्कशीट और बीकॉम की डिग्री जाली है और विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं कि गई है.
कोर्ट ने वकील को उन डिग्रियों की फोटोकॉपी पेश करने का निर्देश दिया है, जिनमें उसने वाणिज्यि और कानून में स्नातक होने का दावा किया गया था. अधिवक्ता ने मगध विश्वविद्यालय द्वारा 1991 में आयोजित तीन वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम की वाणिज्यि स्नातक परीक्षा पास करने के बाद मिली डिग्री की कॉपी दाखिल किया है. वकील का दावा है कि इससे संबंधित रिकॉर्ड को फाड़ दिया गया है. इसलिए उपलब्ध दस्तावेजों से डिग्री की पुष्टि संभव नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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