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चार धाम परियोजना को लेकर दायर अनुपालन रिपोर्ट को मुहैया कराने का सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने चार धाम परियोजना को लेकर दाखिल अनुपालन रिपोर्ट सभी पक्षों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. पर्यावरणीय चिंता और रणनीतिक महत्व के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

Supreme Court
Edited by Akansha

सुप्रीम कोर्ट ने चार धाम परियोजना को लेकर दायर अनुपालन रिपोर्ट को मुहैया कराने का आदेश दिया है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सभी पक्षकारों को अनुपालन रिपोर्ट मुहैया कराने का आदेश दिया है. एनजीटी के आदेश के खिलाफ सिटीजन्स फॉर ग्रीन दून नामक एनजीओ की ओर से याचिका दायर की गई है.

चार धाम परियोजना का उद्देश्य

करीब 900 किलोमीटर लंबी चारधाम सड़क परियोजना रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, जिसकी लागत करीब 12 हजार करोड़ रुपए आने का अनुमान है. इस रणनीतिक परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चार पवित्र शहरों-यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को हर मौसम में संपर्क प्रदान करना है. चारधाम परियोजना के तहत भारत की चीन तक पहुंच और आसान हो जाएगी और किसी भी मौसम में भारतीय सेना चीन से सटे सीमाओं पर पहुंच सकेगी. एनजीटी में ग्रीन दून और अन्य लोगों द्वारा इस परियोजना को चुनौती दी थी.

बिना किसी पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई परियोजना

याचिकाकर्ताओं के अनुसार परियोजना बिना किसी पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई है और उचित वन मंजूरी के बिना 25000 से अधिक पेड़ काटे गए हैं. इसके अलावा इससे पहाड़ों और गंगा की सहायक नदियों को व्यापक नुकसान होगा, क्योंकि मलबे की डंपिंग के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कि गई है. बता दें कि एनजीटी ने परियोजना सेल संबंधित पर्यावरणीय मामलों की देखरेख करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करते हुए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी.

अगर युद्ध छिड़ गया तो सेना इससे कैसे निपटेगी?

एनजीटी के फैसले के मुताबिक सात सदस्यीय समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एक विशेष सचिव कर रहे हैं. इससे पहले सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ये दुर्गम इलाके हैं, जहां सेना को भारी वाहन, मशीनरी, हथियार, टैंक, सैनिकों और खाद्य आपूर्ति को लाने ले जाने की आवश्यकता है. अगर सेना अपने मिसाइल लॉन्चर और मशीनरी और उत्तरी चीन की सीमा तक नहीं ले जा सकती है और भगवान न करें, अगर युद्ध छिड़ गया तो सेना इससे कैसे निपटेगी. हमें सावधान और सतर्क रहना होगा.

-भारत एक्सप्रेस 



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