सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट और अन्य तरह के फायदे पहुचाने की प्रथा पर रोक लगाने के उपाय तलाशने के लिए केंद्र सरकार से कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है. इस कमेटी को लोगों, संस्थाओं द्वारा दिए गए सुझाव और आपत्तियों के आधार पर डॉक्टरों को फ्रीबिज देने से रोकने के लिए सिफारिशें देनी होगी. उसके बाद रिपोर्ट को कोर्ट के समक्ष जमा करवाना होगा.
जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट 29 जनवरी 2027 को मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट उस दायर याचिका पर कमेटी गठित करने का आदेश दिया है, जिसमें कुछ फर्मा कंपनियां डॉक्टरों को इसलिए महंगे गिफ्ट देती है ताकि वो मरीजों को महंगी दवाएं लिख सके. यह याचिका वर्ष 2021 में फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई थी.
डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट और विदेश यात्राएं देने पर उठा सवाल
इस मामले में अदालत ने 8 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने इस दौरान निर्देश दिया था कि दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को लुभाने के लिए कथित तौर पर महंगे गिफ्ट, विदेश यात्रा और अन्य सुविधाएं देने जैसी अनैतिक मार्केटिंग प्रथाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार से तीन सदस्यों की विशेषज्ञ कमेटी बनाने को कहा है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि दवा कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को महंगे उपहार और दूसरे तरह के लाभ देती है.
दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई दवा कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेश यात्रा, कैश और अन्य सुविधाएं देती हैं, जिसके कारण मरीजों को महंगी और कई बार गैर जरूरी दवाएं लिखी जाती है.
इससे सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और जेब पर असर पड़ता है. दायर याचिका में ऐसी गतिविधियां पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ दवा कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की थी.
ये भी पढ़ें- सिर्फ बातें नहीं, अब कमाई का जरिया बना मोबाइल; पीएम मोदी बोले- गांवों तक पहुंची डिजिटल क्रांति
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


