अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Supreme Court: हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 105 साल के बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को माफ कर दिया है. अदालत ने उनकी अत्यधिक उम्र को देखते हुए दोषी रसिक चंद्र मंडल के खिलाफ लंबित मामले को बंद करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने सजा को माफ कर दिया है.
ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तो पर पैरोल पर रिहा किया
अदालत ने 2024 में मंडल को अंतरिम जमानत देने के अपने आदेश को पूरी तरह से लागू और आखिरी घोषित करते हुए कहा कि यदि दोषी की उम्रकैद की सजा खत्म नहीं भी हुई है, तो भी उन्हें दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा. 2024 में स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता रसिक चंद्र मंडल को मौजूदा याचिका लंबित रहने तक ट्रायल कोर्ट द्वारा तय शर्तो पर पैरोल पर रिहा किया जाए.
राज्य सरकार के जवाब के बाद SC ने 2024 में जमानत दी
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में साल 1920 में जन्में मंडल को अपने ही भाई की हत्या के मामले में निचली अदालत ने 1994 में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. उस समय मंडल की उम्र लगभग 68 साल थी. वर्ष 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दिया था. उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा था. सुप्रीम कोर्ट ने भी उस समय मंडल को राहत देने से इनकार कर दिया था.
उसके बाद मंडल ने 2020-21 में 99 वर्ष की आयु में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए मंडल ने कोर्ट में समय से पहले रिहाई की मांग की. जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. राज्य सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में जमानत दे दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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