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आधार कार्ड नियमों में बदलाव की मांग: सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका; ‘घुसपैठियों को रोकने के लिए सिर्फ 6 साल तक के बच्चों का ही बने नया आधार’

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि नया आधार कार्ड केवल 6 साल तक के बच्चों का ही बने. याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान ढीले नियमों का फायदा उठाकर घुसपैठिये आधार बनवा रहे हैं.

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Edited by Vaibhav Gupta

आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि नए आधार कार्ड जारी करने के लिए आयु तय किया जाए. याचिका में कहा गया है कि नया आधार सिर्फ 6 साल तक के बच्चों को ही बनना चाहिए. साथ ही कहा गया है कि वयस्को और किशोरों के लिए आधार बनवाने के नियम बहुत कड़ें होने चाहिए.

मौजूदा व्यवस्था का गलत फायदा

दायर याचिका में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था का फायदा उठाकर घुसपैठिये आसानी से आधार कार्ड बनवा रहे है. उसके बाद खुद को भारतीय कहने लगते है. इससे देश की सुरक्षा, सरकारी संसाधनों और चुनाव प्रक्रिया को खतरा पैदा हो रहा है. दायर याचिका में कहा गया है कि आधार केंद्रों पर बड़े बोर्ड लगाए जाएं. बोर्ड पर इस बात का खास जिक्र हो कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का सबूत है, यह नागरिकता, पत्ते या जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है.

फर्जी दस्तावेज से बने आधार पर कड़ी सजा

याचिकाकर्ता के मुताबिक अगर कोई वयस्क आधार बनवाना चाहता है, तो उसका वेरिफिकेशन एसडीएम या तहसीलदार जैसे अधिकारी द्वारा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में अभी तक 144 करोड़ लोगों का आधार कार्ड बन चुका है. इसलिए नए आधार कार्ड से असली नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होगा. दायर याचिका में कहा गया है कि फर्जी दस्तवेजों से आधार बनवाने वालों को कड़ी सजा होनी चाहिए.

क्या है कमिटी का सुझाव?

याचिकाकर्ता का मानना है कि घुसपैठिये आधार के जरिए राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे अन्य दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं, जिसे रोकना बहुत जरूरी है. बता दें कि कारगिल युद्ध के बाद एक कमेटी गठित की गई थी. कमिटी ने साल 2000 में ये सुझाव दिया था कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को तत्काल आईडी कार्ड जारी किए जाए और बाद में इस प्रक्रिया को पूरे देश में शुरू किया जाए. जिसके बाद जनवरी 2009 को योजना आयोग ने यूआईडीएआई को अधिसूचित किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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