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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला प्रॉपर्टी खरीददारों के लिए चेतावनी, सिर्फ रजिस्ट्री से नहीं मिलेगा मालिकाना हक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ रजिस्टर्ड सेल डीड से किसी संपत्ति पर मालिकाना हक साबित नहीं होता. जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले जरूरी दस्तावेजों और स्वामित्व जांच पर जोर दिया गया है.

supreme court

प्रॉपर्टी से संबंधित दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने घर या फ्लैट खरीदारों की चिंता को बढ़ा दिया है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केवल संपत्ति की रजिस्ट्री यह साबित नही करती है कि आप उस जमीन या फ्लैट के मालिक है.

कोर्ट ने यह फैसला माहनूर फातिमा इमरान बनाम तेलंगाना राज्य मामले में यह फैसला दिया है. अगर आप भी सिर्फ रजिस्टर्ड सेल डीड के आधार पर कोई संपत्ति खरीद रहे हैं या खरीदी है, तो आपको सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ध्यान में रखते हुए यह जानना चाहिए कि किसी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक जताने के लिए कौन-कौन से कागजात जरूरी होते हैं, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन इसमें.से सिर्फ एक होता है.

कोर्ट ने कहा कि संपत्ति का रजिस्ट्रेशन केवल व्यक्ति के दावे का समर्थन कर सकता है. लेकिन ये संपत्ति के कानूनी कब्जे के लिए पर्याप्त नही है. जानकारों के मुताबिक किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले पूरी तरह से शोध करना चाहिए. कम से कम 30 वर्षों के लिए संपत्ति के.स्वामित्व की जांच करनी चाहिए. इसमें संपत्ति के उतपरिवर्तन रिकॉर्ड की जांच करें.

संपत्ति खरीदने से पहले करें पूरी जांच

यह सुनिश्चित करें कि संपत्ति पर कोई लंबित मुकदमेबाजी या कर बकाया न हो. संपत्ति पर दावे के संबंध में एक सार्वजनिक सूचना जारी करें. तेलंगाना में जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ होता है कि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री सिर्फ इस बात का रिकॉर्ड है कि किसी संपत्ति के.सौदे को आधिकारिक रूप से रजिस्टर किया गया है.

गौरतलब है कि साल 1982 में हैदराबाद की एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने एक जमीन अनरजिस्टर्ड सेल एग्रीमेंट के जरिए खरीदी थी. बाद में 2006 में इसे असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने वैलिड तो कर दिया, लेकिन इसकी रजिस्ट्री कभी नही कार्रवाई गई. इसके बाद उस जमीन को आगे कई लोग भी थे.

उन्होंने जमीन पर दावा करते हुए कोर्ट का रुख किया था. ऐसे में.संपत्ति पर मालिकाना हक साबित करने के लिए आपको दूसरी जरूरी दस्तावेज और सबूत भी देने होंगे. इसमें सेल व टाइटल डीड, म्यूटेशन सर्टिफिकेट, पजेशन लेटर, एलॉटमेंट लेटर, इंकम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट और सक्सेशन सर्टिफिकेट शामिल है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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