अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह और विष्णु गुप्ता की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में मांग की गई है कि अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर प्रधानमंत्री ऑफिस की ओर से हर साल चढ़ाई जाने वाली चादर की परंपरा पर तत्काल रोक लगाई जाए. सीजीएआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि 26 दिसंबर या 29 दिसंबर को कोर्ट सुनवाई कर सकता है.
बता दें प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से आज ही अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाने के लिए आज भी भेजा जाना है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू अजमेर पहुचेंगे और उर्स कार्यालय में हिसा लेंगे. इस दौरान अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से चादर पेश की जाएगी.
क्या कहा गया है याचिका में?
याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल परंपरा का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है. याचिकाकर्ता की मानें तो जिस जगह पर दरगाह स्थित है, वहां पहले संकट मोचन महादेव मंदिर था. ऐसे में सरकारी या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा चादर चढ़ाना उचित नहीं है. हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय और कई अन्य नेताओं द्वारा उर्स के दौरान अजमेर की दरगाह में हर साल चादर चढ़ाई जाती है.
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हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग
बता दें कि अजमेर के निचली अदालत में हिंदी सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से एक याचिका दायर की गई थी. दायर याचिका में दरगाह को सर्वे करवाने के बाद फिर से हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि दरगाह में भगवान संकट मोचन महादेव को विराजमान किए जाने और वहां हिंदू रीति रिवाह से पूजा पाठ करने की अनुमति दी जाए. साथ ही उस स्थान पर दरगाह को गैरकानूनी बताते हुए दरगाह कमेटी के अनाधिकृत कब्जे को हटाने की मांग की गई थी. अजमेर दरगाह ने इस मांग पर सख्त आपत्ति जताई थी और इसे साजिश करार दिया था.
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