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‘याचिका चुनिंदा लोगों के खिलाफ नहीं होनी चाहिए’, आपत्तिजनक बयानों के मामले में CJI की टिप्पणी के बाद याचिका वापस

नेताओं के भड़काऊ बयानों पर लगाम लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर CJI सूर्यकांत की पीठ ने तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने याचिका को ‘चुनिंदा’ बताते हुए वकील कपिल सिब्बल को इसे वापस लेने और नई सिरे से पेश करने को कहा है.

Supreme Court Hate Speech Hearing

देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा मुस्लिम समुदाय को लेकर दिए जा रहे आपत्तिजनक बयान के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका को वापस ले लिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की मांग पर याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है, ताकि याचिकाकर्ता संशोधित याचिका दायर कर सकें.

मामले की सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कोर्ट से संशोधित याचिका दायर करने के लिए 2 सप्ताह की समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने दे दिया. कोर्ट ने कहा कि आपने अपनी याचिका में चुनिंदा लोगों के नामों का उल्लेख किया है. आप एक ऐसा संशोधित याचिका दायर करें.

संशोधन याचिका दायर करने की मांग

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि माहौल जहरीला होता जा रहा है. उनकी यह याचिका किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका एक व्यक्ति के खिलाफ लग रहा है. इसलिए याचिका वापस ले और संशोधन याचिका दायर करें. सीजेआई ने कहा कि याचिका चुनिंदा लोगों के खिलाफ नही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि दिशा निर्देश जारी होता है तो सभी पर समान रूप से लागू होता है.

वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए. राजीनीतिक नेताओं का कर्तव्य हैं कि वे देश में भाईचारे को बढ़ावा दें. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अदालत दिशा निर्देश तय कर दे, तो उनका पालन कौन सुनिश्चित करेगा.

कपिल सिब्बल ने क्या कहा?

सिब्बल ने कहा कि कई बार आचार संहिता लागू होने से पहले दिए गए भाषण डिजिटल माध्यमों पर बार-बार प्रसारित होते रहते है. ऐसे में सवाल यह है कि मीडिया की क्या जिम्मेदारी हैं, ताकि लोकतंत्र का माहौल खराब न हो.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों और लोक सेवकों को नियमो का पालन करना ही होता है. उनके लिए ऑल इंडिया सर्विस रूल्स मौजूद हैं. कोर्ट ने कहा कि सभी को संवैधानिक मर्यादा की सीमा में रहकर कार्य करना चाहिए.

जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत पहले ही कौशल किशोर से लेकर अमिश देवगन मामलों में कई दिशा निर्देश जारी कर चुका है. उन्होंने कहा कि इन.दिशा निर्देशों को लागू करने की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की भी है.सिब्बल ने कहा कि हम दिशानिदेश जारी करने की मांग कर रहे है.

याचिका में उठी कौन सी मांग?

यह याचिका पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों, शिक्षाविदों, सिविल सोसाइटी की ओर से असम, यूपी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सहित, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बयानों का जिक्र किया गया था. दायर याचिका में मांग की गई थी कि संवैधानिक और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसे भड़काऊ बयान से रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.

याचिका दायर करने वालों में रूप रेखा वर्मा, मोहम्मद अदीब, हर्ष मंदर, पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, जॉन दयाल, दया सिंह, अदिति मेहता, सुरेश के. गोयल, अशोक कुमार शर्मा, सुबोध बिहारी लाल, राकेश नैयर और सत्यवीर सिंह शामिल हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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