Celina Jaitly Brother Case: अभिनेत्री सेलिना जेटली ने विदेश में हिरासत में बंद अपने भाई, रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली की सुरक्षा और कानूनी मदद के लिए हाई कोर्ट में गुहार लगाई है. कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे विक्रांत को तत्काल कानूनी सहायता और परिवार से संवाद की सुविधा मुहैया कराएं, साथ ही उनकी बहन से मिलने की इच्छा पर भी जवाब मांगें. हालांकि, इस मामले में पारिवारिक विवाद भी सामने आया है, जहां विक्रांत की पत्नी ने खुद को एकमात्र अधिकृत व्यक्ति बताते हुए सेलिना की अर्जी पर अपनी दलीलें पेश की हैं.
पिछले सुनवाई में क्या हुआ?
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट अभिनेत्री सेलिना जेटली की ओर से दायर याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली से मुलाकात करने और एक अमीरात लॉ फर्म, खालिद अल मारी के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी साइन करवाने को कहा था.
केंद्र सरकार ने लॉ फर्म को विक्रांत जेटली के केस लड़ने के लिए एक लेटर जारी किया है. कोर्ट ने कहा था कि अगर वह फर्म से कानूनी मदद लेने को तैयार नहीं है, तो वह किसी दूसरी फर्म का नाम सुझाएंगे. कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से यह भी कहा था कि वह विक्रांत जेटली को उनकी बहन, सेलिना जेटली की अर्जी दे और उनसे पूछा कि क्या वह अपनी बहन से मिलने को तैयार है.
विक्रांत और बहन सेलिना के बीच रिश्ते खराब
इस दौरान कोर्ट ने विक्रांत जेटली की पत्नी चारुल जेटली की दलीलें भी सुनी. उन्होंने कहा था कि विक्रांत और उनकी बहन सेलिना के बीच रिश्ते खराब थे. वह विक्रांत जेटली के लिए वकील करने वाली अकेली ऑथोराइज्ड हैं. कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में एक नोट फाइल करने को कहा है.
सेलिना जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत के समक्ष यह मांग रखी है कि विदेश मंत्रालय की यह संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है कि वह विदेशों में हिरासत में रखे गए भारतीय नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करें. उन्होंने दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि विक्रांत जेटली को तत्काल प्रभावी कानूनी सहायता मुहैया कराई जाए. एमईए द्वारा विधिक खर्चो के लिए आर्थिक सहायता या सहयोग दिया जाए. सेलिना जेटली को अपने भाई से सीधा और वास्तविक समय में. संवाद करने की सुविधा दी जाए.
पारिवारिक अपडेट सुनिश्चित की जाए
जेटली ने दायर याचिका में यह भी कहा है कि चिकित्सकीय उपचार और मानवीय देखभाल के लिए त्वरित राजनयिक कदम उठाए जाएं. भारतीय दूतावास द्वारा नियमित काउंसलर निगरानी और पारिवारिक अपडेट सुनिश्चित किए जाए. यूएई अधिकारियों के.साथ समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कन्वेंशन ऑफ कांसुलर रिलेशंस के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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