Karnataka Honeytrap Case: कर्नाटक में नेताओं और जजों को हनीट्रैप के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया. कोर्ट ने कहा आप झारखंड में रहते हैं तो कर्नाटक की चिंता क्यों करते है. याचिका में कहा गया था कि निगरानी समिति को उन सभी अधिकारियों व व्यक्तियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए जो इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ उठाया है. आरोप एक मौजूदा मंत्री द्वारा लगाए गए हैं, जिन्होंने खुद को पीड़ित बताया है.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि हनीट्रैप जैसे तरीकों से समझौता करने वाले न्यायाधीश न्यायिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते है, और संस्था में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर करते है. याचिकाकर्ता धनबाद का रहने वाला है.
याचिका में कहा गया था कि एक तटस्थ और स्वतंत्र एजेंसी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच ही सच्चाई को उजागर करने और न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करने का एक मात्र तरीका है. याचिका में कहा गया था, इससे कम कुछ भी कर्तव्य का परित्याग और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर और अधिक हमलों के लिए खुला निमंत्रण होगा.
लोकतंत्र की मांग है कि इस मामले में उस तत्परता, गंभीरता और निष्पक्षता के साथ संबोधित किया जाए, जिसकी यह हकदार है. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि हनीट्रैप जैसे तरीकों से समझौता करने वाले न्यायाधीश न्यायिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते है, और संस्था में जनता के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर करते है.
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर चर्चा
याचिका में कहा गया था कि कई मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया के कारण शोर शराबा हो चुका है. ऐसे में यह जरूरी है कि यह अदालत देश के न्यायिक प्रणाली में प्रतिष्ठा और जनता के विश्वास के बचाने के लिए कदम उठाए.
हाल ही में कर्नाटक सरकार के सहकारिता मंत्री के एन राजन्ना ने विधानसभा में दावा किया था कि केंद्रीय नेताओं सहित 48 राजनेता हनीट्रैप में फंस गए है. राजन्ना ने कहा था कि कर्नाटक को सीडी और पेन ड्राइव फैक्ट्री कहा जा रहा है. इनके मुताबिक 48 लोगों की सीडी और पेन ड्राइव उपलब्ध है. इसमें कई केंद्रीय मंत्री भी फंसे है. कई विधायकों ने मंत्री राजन्ना के बयान का समर्थन किया है. विपक्ष के नेता आर अशोक ने मांग की है कि मामले की जांच एक सिटिंग जज से कराई जाए और सरकार से मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है.
उन्होंने कहा हनीट्रैप मामले की जांच मौजूदा जज से कराई जानी चाहिए. हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए. गृह मंत्री को यह घोषणा करनी चाहिए कि वह किस तरह की जांच कराएंगे. वही डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस की कर्नाटक यूनिट के प्रमुख के तौर पर उन्होंने राजन्ना से बात की और उनसे शिकायत दर्ज कराने को कहा. सदन में बयान देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि अगर हनीट्रैप मामले में किसी मे शामिल होने की पुष्टि होती है तो उसे बक्शा नहीं जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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