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दिल्ली दंगे की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, खालिद-इमाम को नहीं मिली जमानत, 5 आरोपियों को मिली राहत

Umar Khalid Bail Rejected: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी, जबकि अन्य 5 आरोपियों को राहत मिली है.

Umar Khalid Bail Rejected: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. वहीं गुलफिशा फातिमा सहित अन्य आरोपियों को जमानत दे दी गई है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने 10 दिसंबर को दोनों पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और 18 दिसंबर तक दस्तावेज जमा कराने का निर्देश दिया था.

आरोप और धाराएं

उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य का परित्याग नहीं है और न्यायालय को व्यवस्थित जांच करनी होगी. कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होते हैं और क्या आरोपी की भूमिका का अपराध से कोई संबंध है.

यूएपीए की व्याख्या

जस्टिस कुमार ने यूएपीए की धारा 15 की व्याख्या की, जिसमें आतंकवादी कृत्य को परिभाषित किया गया है. कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों को एक समान नहीं देखा जा सकता. हाई कोर्ट ने पहले ही जमानत की मांग ठुकराई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में अलग स्थिति में हैं.

पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें

दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि शरजील इमाम का भाषण बाकी आरोपियों पर भी सबूत के तौर पर लागू होता है. कोर्ट ने पूछा कि क्या इन भाषणों को उकसावे या यूएपीए के तहत आतंकी कृत्य माना जा सकता है. बचाव पक्ष ने कहा कि केवल भाषणों के आधार पर आतंकवाद का आरोप नहीं लगाया जा सकता. शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वह आतंकवादी नहीं हैं लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा कहा. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्र विरोधी नहीं हैं लेकिन राज्य ने उन्हें ऐसा बताया. अदालत ने संकेत दिया कि भाषणों की प्रकृति और उनके प्रभाव की गहन पड़ताल होगी.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी महत्व

यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आतंकवाद कानून की व्याख्या के लिहाज से बेहद अहम हो गया है. उमर खालिद की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि जब दंगे हुए तब खालिद दिल्ली में नहीं थे. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए किसी को दंडित नहीं किया जा सकता और किसी अन्य भाषण को उनके नाम से जोड़कर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

हिंसा और चार्जशीट

दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए. हिंसा के दौरान पेट्रोल बम, पत्थरबाजी और तेजाब का इस्तेमाल हुआ. पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया. 16 सितंबर की चार्जशीट पर 7 सितंबर 2020 को संज्ञान लिया गया था. इमाम और खालिद का नाम पहली चार्जशीट में था.

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कोर्ट में चलाए गए वीडियो में शरजील इमाम कहते दिखे कि एक सरकार की मनमानी हम कभी कबूल नहीं करेंगे और काम करने का एक ही तरीका है, सड़क बंद, मामला बंद. अन्य वीडियो में उन्होंने कहा कि दिल्ली में दूध और पानी बंद करना चाहते हैं. ये बयान उस समय के हैं जब नागरिकता कानूनों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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