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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के विश्वविद्यालयों में लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग वाली याचिका को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. रिपोर्ट छात्र संघ चुनावों के लिए नियम निर्धारित करती है, लेकिन कोर्ट ने याचिका को केवल पब्लिसिटी के उद्देश्य वाला बताया और कहा कि याचिका का ठोस आधार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के विश्वविद्यालयों में लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. रिपोर्ट में देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के लिए नियम बताए गए हैं. इस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने किया था. इसका उद्देश्य कैंपस की राजनीति से धनबल और बाहुबल को समाप्त करना और साथ ही शैक्षणिक स्तर को बनाए रखना था.

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इसके पीछे कोई ठोस आधार नहीं है, यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज दिया. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आप सिर्फ बाहर जाकर मीडिया से बात करना चाहते हैं. यह याचिका केवल पब्लिसिटी के लिए लगती है. यह याचिका अधिवक्ता शिव कुमार त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी.

चुनाव से छात्रों के हित और नेतृत्व का विकास संभव

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह सिर्फ यूनिवर्सिटी ऑफ केरल मामले में आए कोर्ट के आदेश के पालन की मांग कर रहे हैं. छात्र संघ छात्रों के हित के लिए काम करते हैं. उनके चुनाव से देश में नए नेता उभरेंगे. यह लोकतंत्र के लिए जरूरी भी है. याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार किया था और भविष्य में उसके आधार पर छात्र संघ चुनाव का आदेश दिया था, लेकिन कई विश्वविद्यालयों में चुनाव नही हो रहे हैं. लिंगदोह समिति की रिपोर्ट में छात्रसंघ चुनाव को लेकर कई नियम तय किए गए थे.

समिति के अनुसार ग्रेजुएट छात्रों के लिए चुनाव लड़ने की आयु सीमा 17 से 22 वर्ष, पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए आयु सीमा 24 से 25 वर्ष तय की गई थी. इसके अलावा चुनाव खर्च, प्रचार के तरीके और अनुशासन से जुड़े कई नियम भी सुझाए गए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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