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क्या अब छिनेगा अमीरों का आरक्षण? क्रीमी लेयर और सामाजिक न्याय पर SC की सख्त टिप्पणी

Supreme Court on OBC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षण का लाभ उन तक पहुंचना चाहिए जो वास्तव में पिछड़े हैं. कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि माता-पिता पहले से ही IAS अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों की स्थिति वंचितों जैसी नहीं रहती. सामाजिक न्याय के लिए इस पर विचार अनिवार्य है.

SUPREME COURT
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court on OBC: सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमीलेयर से जुड़े आरक्षण नियमों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर माता-पिता आईएएस अधिकारी है, तो उन्हें आरक्षण क्यों मिलना चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

कोर्ट ने पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर के लिए आरक्षण से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है. कोर्ट ने इस विषय को सामाजिक न्याय और अवसरों के संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है.

आरक्षण से बाहर निकलना चाहिए

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन लोगों को आगे लाना है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से अब भी पिछड़े हुए हैं. ऐसे में जिन परिवारों ने पहले ही ऊंचे सरकारी पद हासिल कर लिए हैं, उन्हें आरक्षण का फायदा मिलना चाहिए या नहीं, यह सोचने का विषय है.

कोर्ट ने कहा कि छात्रों के माता-पिता अच्छी नौकरियों में है और अच्छी इनकम कर रहे हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण से बाहर निकलना चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण से सामाजिक गतिशीलता आती है .इसलिए बच्चों के लिए आरक्षण की मांग करनी कभी भी इससे बाहर नहीं निकल पाएगा.यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हमें भी ध्यान देना होगा. इस मुद्दे पर गहन विचार विमर्श की जरूरत है.

बहिष्कार पर सवाल उठा रहे

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस और क्रीमी लेयर के बीच भी कुछ अंतर होना चाहिए. याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता शशांक रतनू ने कहा कि लोगों को उनकी सैलरी की वजह से नहीं, बल्कि उनके सामाजिक दर्जे के आधार पर बाहर किया गया है. उन्होंने कहा कि ग्रुप ये कर्मचारियों को बाहर किया गया है और ग्रुप बी कर्मचारियों को भी बाहर किया जाता है.

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कुछ संतुलन होना चाहिए. सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हो, लेकिन जब माता-पिता आरक्षण का लाभ उठाकर एक स्तर तक शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं, तो वे दोनों आईएएस अधिकारी होते हैं. दोनों सरकारी सेवा में होते है. सामाजिक गतिशीलता मौजूद है. अब सरकार के ऐसे आदेश है जो इन सभी लोगों को बाहर कर रहे हैं और वे इस बहिष्कार पर सवाल उठा रहे हैं. इसे भी ध्यान में रखना होगा.

लाभ की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाना है, लेकिन जब एक ही परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उच्च पदों पर पहुच जाते है, तो वहां सामाजिक गतिशीलता पहले ही स्थापित हो चुकी होती है.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब माता-पिता सरकारी सेवा में उच्च पदों पर पहुच चुके होते है, तो उनके बच्चों की स्थिति पहले जैसी वंचित नहीं रह जाती. ऐसे मामलों में आरक्षण के लाभ की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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