भारत के नियंत्रण और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति प्रक्रिया में सीजेआई को शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एक अन्य याचिका के साथ इसे टैग कर दिया है. याचिका में कैंग प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सिफारिश द्वारा करने की मौजूदा व्यवस्था का विरोध किया गया है.
याचिका में मांग की गई है कि नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र पैनल का गठन हो. एज पैनल में प्रधानमंत्री नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की गई है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले को तीन जजों के पास भेजा जाना चाहिए. जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह संवैधानिक मामला है, इसे संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए.
गैर मनमाने सिंद्धान्तों का करना होगा पालन
सीपीआईएल की ओर से दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि अभी सीएजी की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते है. इस पद की अहमियत को देखते हुए इसके लिए योग्य और निष्पक्ष व्यक्ति का चयन जरूरी है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट चयन में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता के अलावे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को शामिल करने का आदेश दे. इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है.
जिसमें संविधान के अनुच्छेद 148 में उल्लिखित सीएजी के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र नियुक्ति प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि संविधान भारत के राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत सीएजी नियुक्त करने का आदेश देता है. हालांकि चयन पद्धति निदिष्ट नहीं है, लेकिन इसे संवैधानिक, गैर मनमाने सिंद्धान्तों का पालन करना होगा. याचिका में यह भी कहा गया है कि कैबिनेट सचिवालय प्रधानमंत्री के विचार के लिए बिना स्थापित मानदंडों के नामों को शॉर्टलिस्ट करता है, इसमें से प्रधानमंत्री एक नाम राष्ट्रपति को भेजते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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