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‘भारत आना है तो जमा करो 70 करोड़’, सुप्रीम कोर्ट ने किस आरोपी के लिए रखी ये शर्त?

Supreme Court news: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक केस की सुनवाई के दौरान आरोपी के सामने भारत लौटने को लेकर शर्त रखी है. SC ने कहा पहले रजिस्ट्री में 70 करोड़ रुपये जमा करने होंगे.

Supreme Court On PM Fincap Case

Supreme Court news

Edited by Sahil Singh

Supreme Court On PM Fincap Case: सुप्रीम कोर्ट ने पीएम फिनकैप लिमिटेड से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में विदेश में रह रहे आरोपी संतोष महालिंगम के भारत लौटने को लेकर अहम शर्त रखी है. अदालत ने साफ कहा है कि महालिंगम को भारत आने और मामले में सरेंडर करने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब वह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 70 करोड़ रुपये जमा करेंगे.

70 करोड़ जमा करो- कोर्ट

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें महालिंगम को भारत लौटकर संबंधित मामले में सरेंडर करने की अनुमति दी गई थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि 70 करोड़ रुपये जमा होने के बाद ही आरोपी के भारत आने के अनुरोध पर विचार किया जाएगा.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह रकम जमा करने की शर्त आरोपी की ओर से दिए गए प्रस्ताव के आधार पर रखी गई है. पीठ ने कहा, “हम उन्हें इजाजत देंगे, बशर्ते वह यहां कम से कम 70 करोड़ रुपए जमा करें.”

35 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ा है मामला

यह पूरा विवाद पीएम फिनकैप लिमिटेड की शिकायत पर गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-III थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के अप्रैल 2026 के आदेश के मुताबिक, मामले में आईपीसी की धारा 120-B, 34, 406, 420, 467, 468, 471 और 506 के तहत आरोप लगाए गए हैं.

शिकायत के अनुसार, संतोष महालिंगम और अन्य आरोपियों से जुड़े दो ट्रस्टों ने मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पीएम फिनकैप लिमिटेड से 35 करोड़ रुपये का लोन लिया था. इसके बदले करीब 63.45 एकड़ जमीन पर सुरक्षा हित बनाया गया था.

कंपनी का आरोप है कि लोन लेते समय जमीन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी छिपाई गई. शिकायत में कहा गया कि जमीन के एक हिस्से को लेकर पहले से ही दूसरे पक्ष के साथ बिक्री का समझौता मौजूद था. बाद में लोन की पूरी रकम नहीं लौटाई गई और कुछ चेक भी बाउंस हो गए.


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हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया था इनकार

महालिंगम और अन्य आरोपियों ने एफआईआर को चुनौती देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था. 2 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग ठुकरा दी. अदालत ने माना कि एफआईआर में पहली नजर में संज्ञेय अपराधों के आरोप सामने आते हैं और केवल इसे कारोबारी या सिविल विवाद बताकर आपराधिक कार्रवाई को खत्म नहीं किया जा सकता.

-भारत एक्सप्रेस



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