सुप्रीम कोर्ट.
सुप्रीम कोर्ट मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को ईडी द्वारा द्वारा तलब किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई (CJI BR Gavai) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ईडी सारी हदें पार कर रही है. कोर्ट ने कहा कि कुछ दिशा निर्देश जारी किया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह टिप्पणी मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुनवाई के दौरान की है.
CJI BR Gavai ने कहा कि अगर वकील द्वारा दी गई सलाह गलत भी है, तो भी उसे कैसे समन जारी किया जा सकता है? यह विशेषाधिकार का मामला है. कोर्ट 29 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. उसी दिन कोर्ट एमिकस क्यूरी नियुक्त करेगा. देशभर के बार एसोसिएशनों के विरोध के बाद ईडी ने समन को.वापस ले लिया था.
बार एसोसिएशनों का विरोध, ED ने समन वापस लिया
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि तुर्की में पूरा बार एसोसिएशन खत्म कर दिया गया हम उसी रास्ते पर जा रहे है. वही अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने ईडी से कहा था कि आपने जो किया है वह गलत है. जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सिर्फ वकीलों को सलाह देने के लिए समन जारी नही किया जाना चाहिए.
CJI BR Gavai ने कहा कि कोर्ट ने बार-बार देखा है कि हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद ईडी राजनीतिक मामलों में लगातार समन जारी कर रही है. SCAORA ने ईडी की कार्रवाई की कड़ी अस्वीकृति और स्पष्ट निंदा करते हुए कहा था कि यह अत्यधिक अनुचित है और कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरा पहुचाता है.
ईडी की यह कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि जांच के दायरे से बाहर निकलने की एक परेशान करने वाली प्रवृति को दर्शाती हैं, जो कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है. कानून के शासन की नींव को कमजोर करती है. जब जांच एजेंसियों केवल कानूनी राय देने के लिए अधिवक्ताओं के खिलाफ बलपूर्वक उपाय करती हैं, तो वे केवल व्यक्तियों को ही निशाना नहीं बनाती है.
ये भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट में फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी, मुख्य न्यायाधीश को जल्द सुनवाई के निर्देश
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

